लंदन , ब्रिटेन में किसी व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाने पर स्वयं को पृथक-वास में रखने की अनिवार्यता खत्म करने का प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की ओर संकेत दिये जाने के बाद वैज्ञानिकों ने सोमवार को इस वायरस की निगरानी की देश की क्षमता को कमजोर करने के विरूद्ध चेतावनी दी।
जॉनसन फ्लू जैसी अन्य संक्रामक बीमारियों की तरह कोविड को भी हल्के में लेने तथा ‘कोविड के साथ जीने’ की सरकार की योजना की संसद में आज ही विस्तार से घोषणा करने वाले हैं।
जांच में कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने पर कम से कम पांच दिनों के लिए खुद को पृथक कर लेने की कानूनी जरूरत हटने की संभावना है तथा इस वायरस को लेकर अब बड़े पैमाने पर परीक्षण भी नहीं होगा।
कुछ वैज्ञानिकों ने कहा कि यह जोखिम भरा कदम है जो संक्रमण को बढ़ा सकता है और भविष्य में इसके अन्य स्वरूपों के विरूद्ध देश के रक्षाचक्र को कमजोर कर सकता है।
कोरोना वायरस के विरूद्ध आस्ट्रेजेनेका टीका विकसित करने वाले ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के निदेशक एंड्रू पोलार्ड ने कहा, ‘‘ कब और कैसे पाबंदियां हटायी जाएं, उसके बारे में निर्णय लेना बड़ा मुश्किल है।’’
उन्होंने कहा कि ‘वायरस को लेकर निगरानी, यदि आप चाहते हैं तो पूर्व चेतावनी प्रणाली, जो नये उभरते स्वरूप के बारे में बताए और इस बात की निगरानी की क्षमता प्रदान करे कि नये स्वरूप ओमिक्रोन की भांति ही अधिक गंभीर बीमारी पैदा करने वाले हैं’ आदि बातें जरूरी हैं।
स्वास्थ्य मनोचिकित्सक और सरकारी परामर्श समिति के सदस्य रॉबर्ट वेस्ट ने व्यक्तिगत रूप से कहा , ‘‘ ऐसा लगता है कि सरकार ने यह कहा है कि वह मानती है कि देश एक ऐसी स्थिति में रहने जा रहा है जहां हर साल कोविड से 20000 और 80000 के बीच मौतें होने वाली हैं और वाकई देश इस बारे में कुछ नहीं करने जा रहा है। ’’
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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