वैश्विक अनिश्चितता के बीच स्टार्मर और शी ने मजबूत साझेदारी का आह्वान किया

बीजिंग, ब्रिटेन और चीन के नेताओं ने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” का आह्वान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल में उठाए गए कई कदमों को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों के बीच बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर की बृहस्पतिवार को मुलाकात हुई। हालांकि शी और स्टार्मर ने सार्वजनिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति का नाम नहीं लिया।

स्टार्मर ने चिनफिंग से कहा ‘‘मेरे हिसाब से ऐसे समय में जब दुनिया मुश्किल दौर से गुजर रही है तब जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करना ही सही मार्ग है जिसके जरिए हमें अपने रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहिए।”

बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात तय समय से दोगुने समय 80 मिनट तक हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कई वर्षों के तनाव के बाद दोनों देश अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में खासकर ब्रिटेन में चीन की जासूसी गतिविधियों यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए चीन के समर्थन और हांगकांग में स्वतंत्रता पर पाबंदियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गयी थी । हांगकांग एक पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश है जिसे 1997 में चीन को सौंपा गया था।

शी चिनफिंग ने कहा “पिछले कुछ वर्षों में चीन-ब्रिटेन के संबंध खास अच्छे नहीं रहे जो किसी भी देश के हित में नहीं थे। मौजूदा परिस्थिति और तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए चीन व ब्रिटेन को आपसी बातचीत व सहयोग मजबूत करने की जरूरत है।”

चीन के सरकारी टीवी चैनल ‘सीसीटीवी’ की खबर के अनुसार शी चिनफिंग ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि “बड़ी ताकतों” को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए वरना दुनिया फिर “जंगलराज” जैसी स्थिति में चली जाएगी।

बैठक के बाद स्टार्मर ने कहा कि दोनों ने ‘स्कॉच व्हिस्की’ पर चीन द्वारा शुल्क कम करना और ब्रिटिश यात्रियों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा शुरू करने समेत कई मुद्दों पर “वाकई अच्छी प्रगति” की है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा “दोनों के संबंध अच्छे दौर में है और मजबूत हैं।”

शी चिनफिंग ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि चीन से संबंध बढ़ाने को लेकर प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर को राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के मुद्दे पर आलोचना झेलनी पड़ी है। हाल में ब्रिटेन ने लंदन में एक बड़े चीनी दूतावास के निर्माण की विवादास्पद योजना को मंजूरी दी है। इससे दोनों देशों के संबंध में गतिरोध तो दूर हुआ लेकिन यह आशंका भी जताई जा रही है कि यह “विशाल दूतावास” चीन के लिए जासूसी करने और असहमति जताने वालों पर दबाव बनाने की उसकी कोशिशों को आसान बना सकता है।

शी ने कहा “जब कुछ अच्छा काम होता है तो चुनौतियां भी साथ आती हैं। अगर कोई काम देश और उसके लोगों के मूल हित में सही है तो नेता चुनौतियों से पीछे नहीं हटते और साहस के साथ आगे बढ़ते हैं।”

स्टार्मर की यात्रा हांगकांग की एक अदालत के उस फैसले के ठीक दो महीने से भी कम समय बाद हो रही है जिसमें समाचार पत्र के प्रकाशक रहे एवं ब्रिटिश नागरिक जिमी लाई को 2019 में प्रजातंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद चीन द्वारा लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दोषी ठहराया गया।

स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने चिनफिंग के सामने मानवाधिकारों के मुद्दे उठाए और दोनों के बीच “सम्मानपूर्वक संवाद” हुआ।

स्टार्मर ने कहा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हुए चीन के साथ कूटनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग जारी रखेंगे। उन्होंने शी से कहा कि किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री के चीन आने में “बहुत ज्यादा समय लग गया।”

स्टार्मर ऐसे समय में ब्रिटेन की कंपनियों के लिए अवसर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं जब उनकी घरेलू अर्थव्यवस्था सुस्त है। इस यात्रा में उनके साथ 50 से अधिक कारोबारी नेता और कुछ सांस्कृतिक संगठनों के नेता भी शामिल हैं।

इससे पहले ब्रिटेन के नेता ने ‘नेशनल पीपुल्स कांग्रेस’ के अध्यक्ष जाओ लेजी से मुलाकात की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ निर्णयों ने वैश्विक व्यापार में जटिलताएं पैदा कर दी हैं इसलिए अब कई देशों के लिए व्यापार और निवेश बढ़ाना जरूरी हो गया है।

स्टार्मर इस महीने बीजिंग दौरे पर आने वाले अमेरिकी सहयोगी देश के चौथे नेता हैं। इससे पहले दक्षिण कोरिया कनाडा और फिनलैंड के नेता बीजिंग आए थे। जर्मनी के चांसलर के अगले महीने आने की उम्मीद है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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