व्यक्तियों को विदेश से खरीद, कमाई की जानकारी देने की जरूरत नहीं, आरबीआई जल्द जारी करेगा एफएक्यू

मुंबई, भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि व्यक्तियों को आयात या निर्यात से होने वाली कमाई की जानकारी देने की जरूरत नहीं है और वह स्थिति साफ करने के लिए जल्द ही अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (एफएक्यू) जारी करेगा। आरबीआई ने लागू की गई नई नियामकीय व्यवस्थाओं को लेकर ‘गलतफहमी’ के बीच यह बात कही। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इकाइयों के मामले में भी प्रति बिल 10 लाख रुपये तक की सीमा के लिए स्व-घोषणा का प्रावधान है।

मल्होत्रा ने कहा कि एकीकृत विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात एवं आयात) विनियमन 2026 को एक अक्टूबर से लागू किया गया है। इसके तहत रिपोर्टिंग यानी जानकारी देने संबंधी जरूरतों के मामले में सेवा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को वस्तुओं का कारोबार करने वाली कंपनियों के बराबर लाया गया है। डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने कहा ‘‘व्यक्तिगत प्रकृति के अनुबंधों के संबंध में व्यक्तियों को रिपोर्टिंग संबंधी जरूरतों के दायरे में नहीं रखा गया है। ऐसा लगता है कि रिपोर्टिंग संबंधी दायित्वों को लेकर कुछ गलतफहमी है। हम जल्द ही एफएक्यू के जरिये इसे स्पष्ट करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है। व्यापार जगत से जुड़े लोगों को पर्याप्त समय दिया गया था। दिशानिर्देश इस साल जनवरी में ही जारी कर दिए गए थे।

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि आरबीआई के मंच पर रिपोर्टिंग बैंकों या अधिकृत डीलर समेत मध्यस्थों को करनी है निर्यातकों या आयातकों को नहीं। उन्होंने कहा ‘‘…हमारा मानना है कि इससे कोई बड़ी असुविधा या बोझ नहीं पड़ेगा…।’’ कुछ जानकारी आयातक और निर्यातक पहले से ही मध्यस्थों के साथ साझा करते रहे हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common.

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