श्रीलंका में विपक्ष ने 30 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क को लेकर सरकार की आलोचना की

कोलंबो,  श्रीलंका के मुख्य विपक्षी नेता ने देश के सभी आयात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 30 प्रतिशत शुल्क को लेकर सरकार की आलोचना की तथा इसे ‘‘खराब वार्ता’’ का परिणाम बताया। अमेरिका ने बुधवार को श्रीलंका समेत सात देशों के शासनाध्यक्षों को पत्र भेजकर उनके आयात पर शुल्क लगाने की बात कही है। अमेरिका का यह कदम कई देशों को लक्षित एक व्यापक व्यापार पहल का हिस्सा है।

             अमेरिका द्वारा लगाए गए इन शुल्कों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्य विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने कहा कि 30 प्रतिशत की दर उचित नहीं है और यह ‘‘खराब बातचीत की कीमत है जो हम चुका रहे हैं।’’

             श्रीलंका ने नये शुल्क (टैरिफ) पर बातचीत के लिए दो दौर की वार्ता की  जिसके बारे में विश्लेषकों का कहना है कि इससे निर्यात क्षेत्र में 50 000 नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।

             राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को लिखे पत्र में कहा गया है कि नया 30 प्रतिशत शुल्क एक अगस्त से लागू होगा। पत्र में कहा गया है  ‘‘एक अगस्त 2025 से हम श्रीलंका से अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी श्रीलंकाई उत्पादों पर केवल 30 प्रतिशत शुल्क लगाएंगे  जो सभी क्षेत्रीय शुल्क से अलग होगा।’’

             इस बीच  अर्थशास्त्री तलाल रफी ने कहा कि 30 प्रतिशत शुल्क स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यधिक नुकसानदेह होगा। रफी ने कहा  ‘‘वियतनाम केवल 20 प्रतिशत शुल्क के कारण बच गया है क्योंकि वे अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क हटाने पर सहमत हो गए हैं।’’

             विश्लेषकों के अनुसार  श्रीलंका पर 30 प्रतिशत शुल्क  जो अप्रैल में प्रस्तावित 44 प्रतिशत से कम है  डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लक्षित किये गए देशों में सबसे बड़ी कटौती है।

             वैश्विक स्तर पर अपने व्यापार असंतुलन को ठीक करने के संबंध में अप्रैल में घोषित अमेरिकी नीति में  श्रीलंका के लिए शुल्क 44 प्रतिशत निर्धारित किया गया था  जो कि देश में आयात के लिए कोलंबो द्वारा वाशिंगटन से वसूले जाने वाले 88 प्रतिशत का आधा है। इंडोनेशिया और थाईलैंड के शुल्क क्रमशः 32 और 36 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहे। दोनों देश अमेरिका को रबर निर्यात के मामले में श्रीलंका के प्रतिस्पर्धी हैं। अमेरिका को श्रीलंका का वार्षिक निर्यात 3 अरब अमेरिकी डॉलर का है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

%d bloggers like this: