नयी दिल्ली, केंद्र ने अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों के लिए अपनी प्रमुख योजना ‘श्रेष्ठ’ में भाग लेने वाले स्कूलों को दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए दाखिला वर्दी किताबें और अन्य खर्चों के लिए शुल्क लेने के खिलाफ चेतावनी दी है।
स्कूलों द्वारा जमानत राशि पिकनिक शुल्क चिकित्सा लागत किताबें वर्दी और स्टेशनरी जैसे विभिन्न मदों के तहत धन मांगने की कई रिपोर्ट सामने आने के बाद यह चेतावनी जारी की गई थी। सात जुलाई को एक आधिकारिक पत्र में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने योजना के तहत भाग लेने वाले सभी आवासीय स्कूलों को याद दिलाया कि श्रेष्ठ (लक्षित क्षेत्रों में उच्च विद्यालयों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा की योजना) कार्यक्रम के तहत कक्षा नौ और 11वीं में प्रवेश लेने वाले एससी छात्रों से कोई शुल्क या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाए। मंत्रालय ने पत्र में कहा कि सभी शैक्षणिक और आवासीय व्ययों का पुनर्भुगतान सरकार द्वारा सीधे स्कूलों को किया जाएगा जो वास्तविक लागत या निर्धारित सीमा जो भी कम हो के आधार पर होगी। अवर सचिव राकेश कुमार ने कहा ‘‘किसी भी परिस्थिति में श्रेष्ठ स्कूलों द्वारा लाभार्थी पर कोई शुल्क या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए।’
’उन्होंने कहा कि इस योजना का लक्ष्य शीर्ष प्रदर्शन करने वाले आवासीय स्कूलों में अनुसूचित जाति के छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली पूरी तरह से वित्तपोषित शिक्षा प्रदान करना है। मंत्रालय ने कहा कि इसके बावजूद उसे स्कूलों द्वारा जमानत राशि पिकनिक शुल्क चिकित्सा लागत पुस्तकें वर्दी और स्टेशनरी जैसे विभिन्न मदों के तहत पैसे मांगने की कई रिपोर्ट मिली हैं। पत्र में कहा गया है कि इस तरह की प्रथाएं नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हैं और चेतावनी दी गई है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के माध्यम से दोषी संस्थानों के खिलाफ ‘‘सख्त कार्रवाई’’ की जाएगी।
मंत्रालय ने सभी स्कूलों से इस योजना का पूरी तरह से पालन करने और इसका सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह किया। पत्र में लिखा है ‘‘एससी छात्रों को समान शैक्षिक अवसर सुनिश्चित करने के लिए योजना के दिशा-निर्देशों पर आपका तत्काल ध्यान और अनुपालन सराहनीय है।’