सहकारिता बैंक घोटाला: कांग्रेस ने वाम सरकार पर निवेशकों को धोखा देने का आरोप लगाया

तिरुवनंतपुरम, केरल में करुवन्नूर सहकारिता बैंक में कोष के गबन के मामले पर वाम सरकार पर हमला करते हुए विपक्षी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर उन लोगों की परेशानी का समाधान नहीं तलाशने का बुधवार को आरोप लगाया जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत वित्तीय संस्थान में जमा कराई थी।

             कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वाम सरकार बैंक का पैसा लूटने वाले और इस पैसे को साझा करने वालों को बचा रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी सतीशन ने यहां एक बयान में कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया था कि घोटाले से प्रभावित कोई भी निवेशक अपना पैसा गंवाएगा नहीं लेकिन उन्हें ठगने की एक और कोशिश की गई है।

             सहकारिता मंत्री वी.एन वासवन ने मंगलवार को कोच्चि में कहा था कि करुवन्नूर बैंक के जमाकर्ताओं को जल्द से जल्द उनका पैसा वापस मिल जाएगा। इसके बाद बुधवार को सतीशन ने रेखांकित किया कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि जिन लोगों ने बैंक में एक लाख रुपये तक जमा कराए थे, उन्हें करीब 50 हजार रुपये वापस मिल जाएंगे।  विपक्ष के नेता ने कहा कि लेकिन सरकार उन लोगों को लेकर चुप है जिन्होंने सेवानिवृत्ति के लाभ या संपत्ति बेचकर लाखों रुपये बैंक में जमा कराए थे।

             उन्होंने करुवन्नूर बैंक में कम से कम 300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने त्रिशूर जिले की सहकारिता बैंकों में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया।

             वासवन ने मंगलवार को कहा था कि सरकार की ओर से घोषित पैकेज के तहत निवेशकों को 73 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अनियमितताओं के सरकार के संज्ञान में आते ही कड़ी कार्रवाई की गई और 18 मामले दर्ज किए गए। मंत्री ने कहा कि सतर्कता जांच भी जारी है और नौ सदस्यीय टीम द्वारा विशेष जांच भी शुरू की गई है। करोड़ों रुपये के करुवन्नूर बैंक घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले हफ्ते माकपा के एक स्थानीय नेता और वडक्कनचेरी नगर पार्षद पी.आर अरविंदाक्षन को गिरफ्तार किया था।

             एजेंसी ने बैंक के एक पूर्व कर्मचारी सी.के जिल्स को भी गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर बैंक के पांच करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी। ईडी ने 11 सितंबर को माकपा के विधायक ए.सी मुईदीन से नौ घंटे से ज्यादा वक्त तक पूछताछ की थी।  त्रिशूर स्थित बैंक में यह कथित धोखाधड़ी 2010 में शुरू हुई थी।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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