सिद्धरमैया ने सामाजिक-आर्थिक सर्वे का बचाव किया, भाजपा पर समाज में असमानता बनाए रखने का आरोप लगाया

बेंगलुरु, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्य में जारी सामाजिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों से समाज में समानता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।  इस सर्वेक्षण को व्यापक रूप से जातिगत गणना कहा जा रहा है।

             उन्होंने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह चाहती है कि समाज में असमानता बनी रहे  ताकि एक समुदाय का वर्चस्व कायम रहे।

             सिद्धरमैया ने एक सवाल के जवाब में पत्रकारों से कहा  “यह एक सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण है। समाज में असमानता है। समानता सुनिश्चित करने के लिए  हमें विभिन्न जातियों के लोगों में गरीबी  बेरोजगारी और निरक्षरता के आंकड़े चाहिए। जब हमें ये आंकड़े पता होंगे  तभी हम आंबेडकर की कल्पना के अनुसार समानता सुनिश्चित कर पाएंगे।”

             उन्होंने केंद्रीय मंत्री एवं जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच डी कुमारस्वामी के उस कथित बयान पर भी कटाक्ष किया  जिसमें उन्होंने कहा था कि जातिगत गणना से समाज को कोई लाभ नहीं होगा।

             कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा किया जा रहा यह सर्वेक्षण 22 सितंबर को शुरू हुआ था और सात अक्टूबर को समाप्त होगा।  उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चाहती है कि एक समुदाय का वर्चस्व कायम रखने के लिए समाज में असमानता बनी रहे। उन्होंने कहा  “वे किसी और चीज के बारे में नहीं सोचते।”

             सिद्धरमैया ने दावा किया  “केंद्र सरकार ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना के दौरान जातिगत गणना कराने का फैसला क्यों किया है  वे हमारे (कांग्रेस) और राहुल गांधी के दबाव में ऐसा कर रहे हैं।” भाजपा ने कांग्रेस पर राज्य में इस सर्वेक्षण के जरिये हिंदुओं को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

             केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या समेत भाजपा के कुछ नेताओं ने तो इस प्रक्रिया का बहिष्कार करने की भी बात कही है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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