ईटानगर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने बृहस्पतिवार को आश्वासन दिया कि संशोधित नागरिकता कानून यानी सीएए के तहत, अरुणाचल प्रदेश में कोई भी शरणार्थी पूर्वोत्तर राज्य के मूल आदिवासियों के अधिकारों का दावा नहीं कर सकता है।
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री ने तागिन समुदाय के शि-दोन्यी उत्सव में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीएए के तहत पूर्वोत्तर को विशेष विशेषाधिकार है क्योंकि इस क्षेत्र को इस कानून के दायरे से छूट दी गई है।
रिजीजू ने कहा, “सीएए के तहत, कोई भी शरणार्थी अरुणाचल प्रदेश में जनजातीय अधिकारों का दावा नहीं कर सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही राज्य में रह रहे चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को स्पष्ट संदेश भेज चुके हैं।”
उन्होंने कहा, “सरकार ने चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को किसी विकल्प (रहने के लिए राज्य) की तलाश करने के लिए संदेश भेजा है। हमें उम्मीद है कि वे सरकार के फैसले का समर्थन करेंगे और उसके अनुरूप काम करेंगे।”
इससे पहले मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने घोषणा की थी कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को राज्य के बाहर पुनर्वासित किया जाएगा।
राज्य में स्वतंत्र उच्च न्यायालय की स्थापना को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में, रिजीजू ने कहा कि अदालत भवन के निर्माण के लिए आवश्यक बजट के साथ राज्य सरकार से पहले प्रस्ताव आना चाहिए और उसके बाद केंद्र इस मामले पर गौर करेगा।
चीन द्वारा राज्य के 15 स्थानों के “नाम बदलने” पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजीजू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और चीन को इस तरह की कवायद करने का कोई अधिकार नहीं है।
क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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