सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास को सही ठहराया है। कोर्ट ने फैसला दिया कि संविधान के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के सत्यापन का अधिकार है।कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और सटीकता ज़रूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि SIR व्यवस्था में प्रक्रिया से जुड़े पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, जिनमें नोटिस, सुनवाई, आपत्तियां, तर्कसंगत आदेश और अपील के प्रावधान शामिल हैं।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि बाद में उसका सत्यापन नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच केवल इस सीमित उद्देश्य के लिए कर सकता है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए या हटाया जाए; नागरिकता की स्थिति पर कोई अंतिम फैसला देने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है।
अदालत ने आगे यह भी कहा कि नागरिकता से जुड़े आधारों पर चुनावी सूचियों से किसी व्यक्ति का नाम हटाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसे गैर-नागरिक घोषित कर दिया गया है, क्योंकि नागरिकता से जुड़े मामलों पर अंतिम अधिकार नागरिकता अधिनियम के तहत सक्षम अधिकारियों के पास ही होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह निर्देश भी दिया कि वह बिहार की चुनावी सूचियों से नागरिकता के आधार पर हटाए गए व्यक्तियों के मामलों को चार हफ़्तों के भीतर उचित प्राधिकारी के पास भेज दे।https://en.wikipedia.org/wiki/Supreme_Court_of_India#/media/File:Supreme_Court_of_India_-_200705_(cropped).jpg