नयी दिल्ली, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा की रक्षा करते हुए सैनिक अभूतपूर्व कठिनाइयों का सामना करते हैं और उनकी सुरक्षा कई बार पर्वतीय बचावकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर सुनिश्चित करते हैं। सिंह ने भारत के अग्रणी पर्वतीय बचाव संगठन ‘तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू (टीएमआर)’ की ओर से यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ‘राष्ट्र के लिए मौन सेवा का एक दशक’ शीर्षक वाली फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया जो टीएमआर की 10 साल की समर्पित सेवा के उपलक्ष्य में आयोजित की गई है।
उन्होंने इस मौके पर कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में टीएमआर के साहस अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा “सीमाओं की रक्षा करते हुए हमारे सैनिक अभूतपूर्व कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई बार तो प्रकृति भी उनके खिलाफ खड़ी हो जाती है। ऐसे में ये पर्वतीय बचावकर्मी ही अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाते हैं।” रक्षा मंत्री ने कहा कि पर्वतीय बचावकर्मी सैनिकों का मनोबल बढ़ाते हैं साथ ही पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को आश्वस्त करते हैं कि वे अकेले नहीं हैं।
उन्होंने कहा “पर्वतीय बचावकर्मियों का मौन लेकिन प्रभावशाली कार्य भारत की सच्ची भावना को दर्शाता है।” रक्षा मंत्री ने कहा कि हालांकि मशीनें सहायता प्रदान करती हैं और प्रणालियां समर्थन देती हैं लेकिन अंतत: वह बचावकर्मी ही होता है जो कर्तव्य की गहरी भावना रखता है और किसी का जीवन बचाने के लिए आगे आता है।
उन्होंने कहा कि टीएमआर ने लगातार साबित किया है कि उसके सदस्य इस भावना के सच्चे संरक्षक हैं और यह संगठन केवल बचाव अभियानों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सीमा पर स्थिरता सामुदायिक विश्वास और राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत कर रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस मौके पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बयान में कहा गया है कि टीएमआर ने मणिपुर तुपुल भूस्खलन (2022) सिक्किम हिमनदी झील में बाढ़ (2023) वायनाड बाढ़ (2024) और धराली भूस्खलन एवं बाढ़ (2025) सहित प्रमुख आपदाओं के दौरान बचाव अभियानों का नेतृत्व एवं समर्थन किया।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common