स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर ‘राजनीतिक पाखंड’ करने का आरोप लगाया

चेन्नई, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष एम के स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए उन पर ‘राजनीतिक पाखंड और प्रशासनिक विफलता’ का आरोप लगाया।

शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में स्टालिन ने छह अक्टूबर के विधानसभा उपचुनाव से पहले मदुरंतकम में विजय के चुनावी भाषण पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को ‘शुद्ध शक्ति’ और द्रमुक को ‘बुरी शक्ति’ बताये जाने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान का मजाक उड़ाया।

अपने चुनावी भाषण के दौरान विजय ने दोहराया कि द्रमुक एक ‘बुरी शक्ति’ है। वह अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले से ही यह आरोप लगाते रहे हैं।

उन्होंने द्रमुक ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जेम ग्रेनाइट्स के अध्यक्ष आर. वीरमणि से जुड़े चर्चित पॉक्सो मामले को पिछली द्रमुक सरकार ने ‘दबा दिया’ था।

स्टालिन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा ‘‘हालांकि मुख्यमंत्री विजय ने कहा है कि उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना छोड़ दिया है लेकिन (असल में) वह अब भी लोगों के सामने अभिनय कर रहे हैं। आज मैंने मदुरंतकम शूटिंग के दौरान आपके डायलॉग बोलने का अंदाज देखा। मेरे पास आपके लिए कुछ सवाल हैं।’’

उन्होंने यह बात विजय द्वारा द्रमुक को ‘बुरी शक्ति’ और टीवीके को ‘शुद्ध शक्ति’ बताए जाने वाले बयान के संदर्भ में कही। उन्होंने के. मारागाथम कुमारवेल समेत अन्नाद्रमुक के पूर्व नेताओं को टीवीके में शामिल किए जाने की ओर इशारा किया।

कुमारवेल को उपचुनाव में टीवीके का उम्मीदवार बनाया गया है।

स्टालिन ने सवाल किया कि ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल किए जाने के बाद टीवीके खुद को ‘शुद्ध शक्ति’ कैसे बता सकती है।

उन्होंने विजय पर वास्तविक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने ‘समर्पण’ करने का आरोप लगाया।

स्टालिन ने पूछा ‘‘सरकार बनने के बाद आपने भाजपा के खिलाफ कितनी बार बात की है आपने कितने विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है भाजपा के खिलाफ आपने जो कुछ भी किया क्या वह केवल शांतिपूर्ण क्रांति थी या वास्तव में समर्पण था ’’

आरोप लगाया कि टीवीके ने बढ़-चढ़कर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश की थी।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मतदान के दौरान नाखूनों पर लगाई गई “न मिटने वाली स्याही” का निशान उंगलियों से मिटने से पहले ही अन्नाद्रमुक के विधायकों को तोड़कर अपने साथ ले जाने की कार्रवाई को “शुद्ध शक्ति” कहा जा सकता है

सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम के कामकाज पर निशाना साधते हुए स्टालिन ने आरोप लगाया कि उनकी कल्याणकारी योजनाएं असल में द्रमुक की ही योजनाएं थीं जिन्हें बस नए नाम से पेश किया गया था।

उन्होंने बिजली कटौती महंगाई दूध की कमी और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को संभालने के तरीके को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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