तिरुवनंतपुरम केरल में हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के शानदार प्रदर्शन के बाद पूर्व सहयोगी केरल कांग्रेस (मणि) की यूडीएफ में संभावित वापसी को लेकर गठबंधन के घटक दलों में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। केरल कांग्रेस (एम) फिलहाल राज्य में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का हिस्सा है।
यूडीएफ के कुछ नेताओं ने जहां विपक्षी गठबंधन में केरल कांग्रेस (एम) की संभावित वापसी का स्वागत किया है वहीं कई नेताओं ने इस पर कड़ा एतराज जताया है।
मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस समेत यूडीएफ के सहयोगी दल गठबंधन को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दक्षिण केरल और मालाबार क्षेत्र के मतदाताओं ने स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ का मजबूती से समर्थन किया।
थंगल ने कहा “ऐसी कई पार्टियां हैं जिनकी विचारधारा यूडीएफ से मिलती-जुलती है। एलडीएफ के भीतर भी ऐसी पार्टियां हैं जो वाम मोर्चे से असंतुष्ट हैं। हमें उम्मीद है कि एलडीएफ की वे पार्टियां जो हमारी विचारधारा से सहमत हैं यूडीएफ में वापस लौट आएंगी।” यह पूछे जाने पर कि क्या उनका इशारा केरल कांग्रेस (एम) की तरफ है थंगल ने कहा कि उनका इशारा किसी विशिष्ट पार्टी की ओर नहीं है।
थंगल के साथ मौजूद मुस्लिम लीग के नेता पीके कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि यूडीएफ के विस्तार के संबंध कोई भी फैसला गठबंधन को सामूहिक रूप से लेना होगा। उन्होंने कहा “यूडीएफ की विचारधारा का समर्थन करने वाली पार्टियों के लिए गठबंधन में शामिल होने के वास्ते अनुकूल माहौल है।”
हालांकि जब कुन्हालीकुट्टी से जमात-ए-इस्लामी से जुड़ी वेलफेयर पार्टी के यूडीएफ में शामिल होने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह कुछ विशिष्ट पार्टियों के बारे में सवालों का जवाब नहीं देंगे।
यूडीएफ का अहम हिस्सा रही केरल कांग्रेस (एम) की कमान पार्टी के कद्दावर नेता एम मणि के निधन के बाद उनके बेटे जोस के मणि के हाथों में आ गई थी। जोस के नेतृत्व में पार्टी ने यूडीएफ छोड़ सत्तारूढ़ एलडीएफ का दामन थाम लिया था। हालांकि केरल कांग्रेस (जोसेफ) ने केरल कांग्रेस (एम) को यूडीएफ में वापस लाने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया है।
पार्टी के संस्थापक-नेता पीजे जोसेफ ने सोमवार को कहा कि वह इस मुद्दे पर कुछ यूडीएफ नेताओं की ओर से की गई टिप्पणियों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
उन्होंने कहा “जब यूडीएफ ने इतनी बड़ी चुनावी जीत हासिल कर ली है तो केरल कांग्रेस (एम) को वापस आने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे नहीं लगता कि केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष ने यह टिप्पणी गंभीरता से की थी।” जोसेफ ने आरोप लगाया कि केरल कांग्रेस (एम) एलडीएफ के भीतर अप्रासंगिक हो गई है।
उन्होंने कहा “शबरिमला में ‘सोना चोरी’ का मामला सामने आने पर वह मूक दर्शक बनी रही। उसने किसी भी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।” जोसेफ ने कहा कि विधानसभा चुनाव तक यूडीएफ के भीतर सभी मुद्दों पर आम सहमति कायम कर ली जाएगी। उन्होंने कहा “अगर कोई मुद्दा बाकी रह जाता है तो उसे भी सुलझा लिया जाएगा।” केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा था कि यूडीएफ में वापस लौटना है या नहीं यह फैसला केरल कांग्रेस (एम) को करना है।
उन्होंने एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा था “जब समय आएगा तब हम फैसला करेंगे। गठबंधन की राजनीति में लोगों को इंसान के रूप में और सहयोगियों को सहयोगी के रूप में स्वीकार करना आवश्यक है।”
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने सोमवार को कहा कि यूडीएफ को मजबूत करने के प्रयासों के तहत गठबंधन का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा “हो सकता है कि एलडीएफ या राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से जुड़ी कोई पार्टी या ऐसा कोई दल जो किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं यूडीएफ में शामिल हो जाए। हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। अगर हम अभी कुछ कहेंगे तो सस्पेंस खत्म हो जाएगा।”
केरल कांग्रेस (एम) ने यूडीएफ में संभावित वापसी को लेकर जारी अटकलों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
केरल में स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ ने छह नगर निगमों में से चार पर कब्जा कर लिया जबकि एलडीएफ ने कोझिकोड नगर निगम में अपनी सत्ता बरकरार रखी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राजग ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत हासिल की।
यूडीएफ ने राज्य की 14 जिला पंचायतों में से सात में जीत हासिल की जबकि एलडीएफ ने बाकी सात में जीत दर्ज की।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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