स्थायी सदस्यता वाले देश स्पष्ट रूप से संरा में सुधार देखने की जल्दी में नहीं : विदेश मंत्री जयशंकर

वियना, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की धीमी गति की आलोचना करते हुए कहा कि जो देश स्थायी सदस्यता का लाभ उठा रहे हैं वे सुधारों को देखने की जल्दी में नहीं हैं।

सुरक्षा परिषद में काफी समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए भारत संयुक्त राष्ट्र में प्रयास करने में अग्रणी रहा है। भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि वह एक स्थायी सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण निकाय में स्थान का हकदार है।

जयशंकर ने सोमवार को ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय प्रसारक ओआरएफ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “आपके सामने ऐसी स्थिति होगी जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों में नहीं होगा, यह संयुक्त राष्ट्र की स्थिति के बारे में क्या कहता है।”

यह पूछे जाने पर कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस सुधार में कितना समय लगेगा, उन्होंने कहा, “…जो लोग आज स्थायी सदस्यता के लाभों का आनंद ले रहे हैं, वे स्पष्ट रूप से सुधार देखने की जल्दी में नहीं हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत संकीर्ण नजरिया है … क्योंकि अंतत: संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और उनके अपने हित और प्रभावशीलता दांव पर हैं।”

जयशंकर ने कहा, “तो मेरी समझ है, इसमें कुछ समय लगेगा, उम्मीद है कि बहुत अधिक समय नहीं लगेगा। सिर्फ हम ही नहीं, मैं संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच बढ़ती भावना को देख सकता हूं, जो मानते हैं कि उन्हें बदला जाना चाहिए।”

विश्व निकाय के पांच स्थायी सदस्य रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और अमेरिका हैं और ये देश किसी भी मूल प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं।

जयशंकर ने कहा, “आपके पास पूरा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका छूटा हुआ है, विकासशील देशों का बहुत कम प्रतिनिधित्व है। यह 1945 में बनाया गया एक संगठन था। लेकिन अब यह साल 2023 है।”

उन्होंने आगे कहा कि हमें “दुनिया के व्यापक हिस्सों में यह भावना बढ़ानी चाहिए कि यह सुधार नितांत आवश्यक है।”

समकालीन वैश्विक वास्तविकता को दर्शाने के लिए स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग बढ़ रही है।

जयशंकर साइप्रस से ऑस्ट्रिया पहुंचे और अपने दो देशों के दौरे के दूसरे चरण में हैं।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Associated Press (AP)

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