तोक्यो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को तोक्यो में चार देशों के समूह ‘चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद’ (क्वाड) की आमने-सामने हुई दूसरी शिखर वार्ता में कहा कि इसके सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और दृढ़ संकल्प न सिर्फ लोकतांत्रिक ताकतों को नयी ऊर्जा दे रहा है, बल्कि एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थापना को प्रोत्साहित भी कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक रचनात्मक एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे ‘‘वैश्विक कल्याण की दिशा में काम करने वाली एक ताकत’’ के रूप में उसकी छवि और मजबूत होगी।
भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान से बने क्वाड समूह के नेता यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रमण और चीन के साथ प्रत्येक सदस्य देश के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार आ रही गिरावट से उपजे भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच जापान की राजधानी में मिल रहे हैं।
सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने जहां यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध की कड़े शब्दों में निंदा की, वहीं मोदी ने इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहा।
प्रधानमंत्री ने कहा, “क्वाड ने बेहद कम समय में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। आज, क्वाड का दायरा व्यापक और इसका स्वरूप बेहद प्रभावी हो गया है।”
उन्होंने कहा, “हमारा आपसी विश्वास, हमारा संकल्प, लोकतांत्रिक ताकतों को नयी ऊर्जा व उत्साह दे रहा है। क्वाड के स्तर पर हमारा आपसी सहयोग एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है, जो हम सभी का एक साझा उद्देश्य है।”
मोदी ने कोविड-19 महामारी के बावजूद क्वाड देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कोविड-19 की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद हमने टीका वितरण, जलवायु कार्रवाई, आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने, आपदा प्रतिक्रिया और आर्थिक सहयोग की दिशा में आपसी समन्वय बढ़ाया है। यह हिंद-प्रशांत में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है।”
अपने संबोधन में मोदी ने अपने नवनिर्वाचित ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीस की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर अल्बानीस का इस सम्मेलन में हिस्सा लेना क्वाड के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सम्मेलन में बाइडन ने कोविड-19 के खिलाफ जंग में क्वाड देशों के बीच साझेदारी के महत्व के बारे में बात की, लेकिन उनका अधिकतर संबोधन यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई पर केंद्रित रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम अपने साझा इतिहास के एक काले अध्याय से गुजर रहे हैं।” बाइडन के मुताबिक, यूक्रेन की स्थिति एक यूरोपीय मसले से कहीं अधिक है, यह एक वैश्विक मसला है।
उन्होंने कहा, “यूक्रेन के खिलाफ रूस के क्रूर और बिना उकसावे वाले युद्ध ने मानवीय तबाही मचा दी है। निर्दोष नागरिक सड़क पर आ गए हैं और लाखों शरणार्थी आंतरिक रूप से विस्थापित होने के साथ-साथ निर्वासित भी हो गए हैं।”
बाइडन ने कहा, “यह एक वैश्विक मुद्दा है। तथ्य यह है कि जब आप टीवी ऑन करते हैं और देखते हैं कि रूस क्या कर रहा है तो मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक संस्कृति को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वह अब सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि हर स्कूल, हर संस्कृति, हर इतिहास संग्रहालय पर हमला कर रहे हैं।”
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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