31 राज्यों के 4,543 अनाथ बच्चों को मिल रहा ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना का लाभः आरटीआई

नयी दिल्ली, कोविड-19 वैश्विक महामारी में अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोने वाले 31 राज्यों के 4 543 बच्चों को ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत लाभ प्रदान किया जा रहा है। ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर एक आवेदन में केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने यह जानकारी मुहैया कराई है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत 9 300 से अधिक आवदन प्राप्त हुए थे। मंत्रालय ने बताया कि इस योजना का लाभ पाने वालों में 2 362 लड़के और 2 181 लड़कियां शामिल हैं। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 31 मार्च 2025 तक भारत में कोविड-19 से आधिकारिक तौर पर कुल 5 33 664 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 मई 2021 को ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना की शुरुआत की थी जिसका उद्देश्य महामारी से प्रभावित अनाथ बच्चों को दीर्घकालिक सहायता प्रदान करना था। योजना के तहत तीन मार्च 2020 से पांच मई 2023 के दौरान कोविड-19 महामारी के कारण अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावक को खोने वाले बच्चे लाभ के पात्र थे। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक देश के 31 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 558 जिलों से प्राप्त आवेदनों में से 4 543 आवेदन को मंजूरी दी गयी।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा मंजूर किये गये आवेदनों वाले राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा। महाराष्ट्र से 856 उत्तर प्रदेश से 467 मध्यप्रदेश से 435 तमिलनाडु से 426 आंध्र प्रदेश से 351 तेलंगाना से 257 कर्नाटक से 232 गुजरात से 227 राजस्थान से 210 दिल्ली से 153 केरल से 119 ओडिशा से 112 और छत्तीसगढ़ से प्राप्त 109 आवेदनों को मंजूरी दी गयी। इन राज्यों के अलावा हरियाणा से 99 बिहार से 83 पश्चिम बंगाल से 58 असम से 55 झारखंड से 49 उत्तराखंड से 44 पंजाब से 42 हिमाचल प्रदेश से 25 और मणिपुर से 21 आवेदनों को मंजूरी दी गयी।इनमें सबसे कम आवेदन करने वाले राज्यों में गोवा से छह अरुणाचल प्रदेश से आठ दादरा-नगर हवेली एवं दमन-दीव से 12 चंडीगढ़ व पुडुचेरी से 13-13 मिजोरम व नगालैंड से 14-14 जम्मू-कश्मीर से 18 और मेघालय से 15 बच्चे इस योजना के लिए पात्र पाये गये।

इस योजना के तहत बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा स्कूली और उच्च शिक्षा के लिए विशेष व्यवस्था केंद्रीय नवोदय विद्यालय या निजी विद्यालों में दाखिला 18 वर्ष की आयु तक 10 लाख रुपये विशेष कोष में जमा किया जाना शामिल है जो 23 वर्ष की उम्र में मासिक सहायता के रूप में उन्हें मिलेगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के उपसचिव एवं केंद्रीय जन सूचना अधिकारी एसबी पांडेय के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कोविड के दौरान अपने माता-पिता को खोने वाले छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को योजना के तहत प्री-स्कूल शिक्षा-प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा टीकाकरण स्वास्थ्य जांच के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं से सहायता दी जाती है।

जानकारी के मुताबिक 10 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी नजदीकी स्कूल में यानी सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल/केंद्रीय विद्यालय (केवी)/निजी विद्यालयों में प्रवेश दो सेट पोशाक और पाठ्यपुस्तक मुफ्त प्रदान की जाती है।कार्यालय ने बताया कि वहीं निजी विद्यालयों में पढ़ाई के लिए शिक्षण शुल्क में छूट दी जाती है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में जहां बच्चा उपरोक्त लाभ प्राप्त करने में असमर्थ है आरटीई मानदंडों के अनुसार स्कूल फीस ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना से दी जाएगी।

इस योजना के तहत यूनिफॉर्म पाठ्यपुस्तकों और नोटबुक पर होने वाले खर्च के लिए भी भुगतान किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक बच्चे की आयु के आधार पर प्रत्येक मामले में अलग-अलग एकमुश्त अंशदान जिलाधिकारी द्वारा बच्चे के खाते में इस प्रकार जमा किया जाते हैं कि बच्चे के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर कुल राशि 10 लाख रुपये हो जाए।

केंद्रीय जन सूचना अधिकारी के मुताबिक एक साल की उम्र में अनाथ हुए बच्चे के खाते में एकमुश्त 2 87 870 रुपये जमा कराये जाते हैं और यह राशि बच्चे के 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर करीब 10 लाख रुपये हो जाती है। उम्र के हिसाब से ये राशि अलग- अलग होती है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी से इस विषय पर टिप्पणी करने के लिए ईमेल और फोन के जरिए संपर्क किया गया लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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