भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत आने वाली भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (I2I) कनेक्ट”—जो भारत का सबसे बड़ा बायोमेडिकल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सुविधा कार्यक्रम है—का सफलतापूर्वक आयोजन किया।इस कार्यक्रम के साथ ही ICMR की ‘मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र’ पहल के तहत, बायोमेडिकल नवाचारों को प्रदर्शित करने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए समर्पित देश के पहले व्यवस्थित मंचों में से एक की स्थापना हुई। इस पहल का उद्देश्य, उद्योग जगत के साथ मज़बूत साझेदारियों के माध्यम से, स्वदेशी बायोमेडिकल अनुसंधान को सुलभ और वास्तविक दुनिया के स्वास्थ्य समाधानों में बदलना है।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने NITI के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास की उपस्थिति में किया।मुख्य भाषण देते हुए राज्य मंत्री श्री जाधव ने कहा, “यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो यह सुनिश्चित करती है कि हमारी प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी तकनीकों में बदलें जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करें और ‘विकसित भारत’ को आगे बढ़ाएं।
भारत अब स्वास्थ्य तकनीकों का केवल उपभोक्ता बने रहने के बजाय, ICMR जैसे संस्थानों और मजबूत औद्योगिक साझेदारियों की मदद से, किफायती और अभिनव स्वास्थ्य समाधानों का एक वैश्विक स्रोत बनने की ओर अग्रसर है।”इस अवसर पर बोलते हुए NITI आयोग के सदस्य डॉ. गोबर्धन दास ने कहा, “भारत के पास स्वास्थ्य तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। ‘मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र’ बौद्धिक संपदा की सुरक्षा करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाने और स्वदेशी नवाचारों की प्रयोगशालाओं से समाज तक की यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”ICMR के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, “’मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र’ ICMR की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है
कि अत्याधुनिक अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक ही सीमित न रहें, बल्कि मजबूत औद्योगिक साझेदारियों और प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचें।”इस कार्यक्रम के दौरान, ‘इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट’ और ‘टेक्नोलॉजी कंपेंडियम’ भी जारी किए गए, जो भारत के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ICMR संस्थानों और नवाचारकर्ताओं द्वारा विकसित 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य तकनीकों का, उनके आगे के विकास, निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए औद्योगिक साझेदारों को हस्तांतरण था।
इन तकनीकों में उन्नत निदान पद्धतियां, टीके, चिकित्सा उपकरण और बायोमेडिकल समाधान शामिल हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को संबोधित करते हैं। हस्तांतरित तकनीकों में टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट और रिकॉम्बिनेंट टीके, साथ ही जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक (TB) और Mpox जैसी बीमारियों के निदान के लिए तकनीकें शामिल थीं।एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत, निष्क्रिय (inactivated) KFD और चांदिपुरा वायरस सहित कई सु-विशेषीकृत बायोमटेरियल्स (जैव-सामग्रियां) भी औद्योगिक साझेदारों को हस्तांतरित किए गए, जिससे भारत के बायोमेडिकल अनुसंधान और निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली।
इस कार्यक्रम में ICMR संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र की 100 से अधिक तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया, और साथ ही नवाचारकर्ताओं तथा औद्योगिक हितधारकों के बीच सीधे संवाद और जुड़ाव को भी सुगम बनाया गया। इनोवेटर्स और इंडस्ट्री को जोड़ने की पहल से उम्मीद है कि यह ‘विकसित भारत 2047’ के लिए भारत के बायोमेडिकल सेक्टर को मज़बूत करने में, एक मज़बूत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए, एक अहम भूमिका निभाएगी।https://x.com/mpprataprao/status/2058851743736467818/photo/2