PM मोदी ने “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास को फिर से शुरू करने” पर G7 आउटरीच सेशन को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस के एवियन में “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास को फिर से शुरू करने” पर G7 आउटरीच सेशन को संबोधित किया। उन्होंने ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच समावेशी विकास, मज़बूत सप्लाई चेन और बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भारत का विज़न पेश किया।दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज विकास का सवाल GDP के आंकड़ों और व्यापार की संख्याओं से कहीं आगे है; अब इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि विकास का फ़ायदा किसे मिलता है, इसमें कौन-कौन शामिल होता है और यह किस दिशा में आगे बढ़ता है।

उन्होंने समावेशी विकास को एक उम्मीद से हकीकत में बदलने के उदाहरण के तौर पर भारत के विकास के सफ़र का ज़िक्र किया और कहा कि जब भारत तरक्की करता है, तो दुनिया की एक-छठी आबादी भी उसके साथ आगे बढ़ती है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास गाथा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के सिद्धांत पर आधारित है, जो दुनिया के साथ भारत के जुड़ाव का भी आधार है।

G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत की थीम “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह सोच दुनिया को एक परिवार के तौर पर देखने की भारत की सांस्कृतिक मान्यता को दिखाती है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत के नज़रिए का अहम हिस्सा है।भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) का ज़िक्र करते हुए मोदी ने इसे एक ऐतिहासिक पहल बताया जो एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को एक रणनीतिक नेटवर्क के ज़रिए जोड़ती है। इसका मकसद व्यापार को बढ़ावा देना, सप्लाई चेन को मज़बूत करना और निवेश, रोज़गार व इनोवेशन के मौके पैदा करना है। उन्होंने स्थानीय भागीदारी, पारदर्शी फाइनेंसिंग और लंबे समय तक चलने वाली स्थिरता पर आधारित ऐसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में हाल के संकटों का ग्लोबल ईंधन, खाद और खाद्य सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने चेतावनी दी कि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के देशों को लंबे समय तक इसके नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे झटकों का बोझ सिर्फ़ कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं पर नहीं पड़ना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से अपील की कि वे ऐसे खास सपोर्ट सिस्टम बनाएं जो विकासशील देशों को आर्थिक झटकों से उबरने और मज़बूत बनने में मदद करें।अपने भाषण की अहम घोषणाओं में से एक में, मोदी ने ‘इंटरनेशनल मोबिलाइज़ेशन पार्टनरशिप फ़ॉर एक्सेलेरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड’ (IMPACT) बनाने का प्रस्ताव रखा।

IMEC विज़न से प्रेरित यह पहल अफ़्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप देशों को जोड़ने वाले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देगी। उन्होंने व्यापार, टेक्नोलॉजी और एनर्जी कॉरिडोर बनाने के लिए G7 देशों की पूंजी, भारत के टैलेंट पूल और ग्लोबल साउथ के देशों की भागीदारी को एक साथ लाने का सुझाव दिया, ताकि नए मौके पैदा हों और आर्थिक एकीकरण तेज़ी से हो।प्रधानमंत्री ने विकसित देशों में बढ़ती उम्र वाली आबादी और भारत व कई ग्लोबल साउथ देशों में मौजूद युवा टैलेंट के बड़े पूल के बीच जनसांख्यिकीय अंतर पर भी ज़ोर दिया।

ग्लोबल साउथ के देशों के बीच इस आपसी पूरकता का लाभ उठाने के लिए, उन्होंने ‘ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप’ (वैश्विक कौशल साझेदारी) बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका फोकस स्किल मैपिंग, वर्कफोर्स डेवलपमेंट और देशों के बीच कुशल लोगों की भरोसेमंद आवाजाही पर होगा।वैश्विक समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए, मोदी ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने इस शिखर सम्मेलन में शामिल कई देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत के उस विश्वास को दर्शाता है जिसमें वह बंटवारे के बजाय एकीकरण, संरक्षणवाद के बजाय साझेदारी और अनिश्चितता के बजाय साझा समृद्धि को प्राथमिकता देता है।सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ठोस विकास से समावेश और कल्याण होता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से ऐसे तंत्र विकसित करने का आग्रह किया जो विकासशील देशों में आर्थिक मजबूती (resilience) को बढ़ा सकें।

उन्होंने दोहराया कि प्रस्तावित ‘IMPACT’ पहल G7 की पूंजी, भारतीय प्रतिभा और ग्लोबल साउथ की भागीदारी को एक साथ लाकर उभरते क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और व्यापार को मज़बूत कर सकती है।अपने संबोधन के समापन पर, प्रधानमंत्री मोदी ने साझा आर्थिक मजबूती को बढ़ाने और एक अधिक स्थिर, विश्वसनीय और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।https://x.com/MEAIndia/status/2067197308924531020/photo/1

%d bloggers like this: