RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार के लिए नियामक उपाय घोषित किए

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार में अनुशासन और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने तथा विदेशी मुद्रा बाजार के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए नियामक उपाय घोषित किए हैं। ये उपाय 10 अक्टूबर, 2026 को जारी दो सर्कुलर के माध्यम से लागू किए गए।नए निर्देशों के तहत, अधिकृत डीलर (Authorised Dealers) उपयोगकर्ताओं को रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों (चाहे वे डिलीवरी-योग्य हों या गैर-डिलीवरी योग्य) को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं दे सकते, यदि निर्देश जारी होने के बाद किसी अधिकृत डीलर के साथ उन्हें रद्द किया गया था। मौजूदा नियामक प्रावधानों के अधीन, परिपक्वता (maturity) पर अनुबंधों को आगे बढ़ाने (rollover) की अनुमति बनी रहेगी।

RBI ने सभी अधिकृत डीलरों के लिए, अंतर्निहित जोखिम (underlying exposure) के अस्तित्व को स्थापित किए बिना अनुबंधित जोखिम (contracted exposures) को हेज (hedge) करने के उद्देश्य से विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने की सीमा को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से घटाकर 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर कर दिया है। रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव में पोजीशन के लिए सीमा को भी सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों में मिलाकर USD 5 मिलियन के बराबर कर दिया गया है।

अधिकृत डीलरों को यह पुष्टि करने वाला एक अंडरटेकिंग (वचन-पत्र) लेना और अपने पास रखना होगा कि उसी अंडरलाइंग एक्सपोज़र को किसी अन्य अधिकृत डीलर के साथ हेज नहीं किया गया है। जहां एक्सपोज़र को कई डीलरों के माध्यम से हिस्सों में हेज किया जाता है, वहां अंडरटेकिंग में उन राशियों का उल्लेख होना चाहिए जो पहले ही अन्य डीलरों के साथ बुक की जा चुकी हैं। नियमों का पालन सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी डीलरों की है और उन्हें कम से कम दो वर्षों तक ज़रूरी सहायक दस्तावेज़ अपने पास रखने होंगे।

ये निर्देश तुरंत लागू होंगे।RBI ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए एक फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व (FERR) भी शुरू किया है, जिनकी कीमत USD 2 मिलियन से अधिक है और जो चालू खाते के उन लेन-देन को हेज करते हैं जिनमें यूज़र रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदते हैं। अधिकृतडीलर को हर कॉन्ट्रैक्ट के खत्म होने तक, उसके रुपये के बराबर की नोशनल वैल्यू (notional value) का 20 प्रतिशत हिस्सा RBI के पास कैश रिज़र्व के तौर पर रखना होगा।

यह रिज़र्व रोज़ाना बनाए रखना होगा और RBI के सेंट्रलाइज़्ड इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के ज़रिए इसकी रिपोर्ट देनी होगी। रिज़र्व की ज़रूरत से बचने के लिए एक या ज़्यादा अधिकृत डीलरों के बीच ट्रांज़ैक्शन को बांटना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। यह नियम उन कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होता है जो निर्देश जारी होने के बाद किए गए हैं।https://en.wikipedia.org/wiki/Reserve_Bank_of_India#/media/File:Seal_of_the_Reserve_Bank_of_India.svg

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