अदालत ने केजी-डी6 में लागत वसूली विवाद मामले में केंद्र की याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मध्यस्थता न्यायाधिकरण में तीन न्यायाधीशों में दो की नियुक्ति से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. (आरआईएल) के केजी-डी6 गैस ब्लॉक में लागत वसूली विवाद मामले को देख रहा है।

केंद्र सरकार ने याचिका में कथित पक्षपात के कारण दोनों न्यायाधीशों को उनके कार्यों से मुक्त करने का निर्देश देने का आग्रह किया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने आरआईएल की तरफ से पेश वकील की शुरुआती आपत्ति को बरकरार रखा और कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की याचिका टिकने योग्य नहीं है और उसे खारिज किया जाता है।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के सदस्यों के खिलाफ सरकार के आरोपों पर न तो विचार किया और न ही फैसला सुनाया और सभी दलीलों को खुला रखा है।.

अदालत में आरआईएल के वकील ने सरकार की याचिका को सुनवाई योग्य होने को लेकर आपत्ति जतायी और कहा कि चूंकि वर्तमान मामले में मध्यस्थता न्यायाधिकरण को चुनौती पूर्वाग्रह और मध्यस्थों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के संबंध में संदेह के आधार पर दी गई है, यह केवल धारा 13 में निर्दिष्ट प्रक्रिया है जिसका पालन किया जा सकता था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उसे केंद्र के वकील की इस दलील में कोई दम नहीं दिखा कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण के सदस्य मामले में पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और मामले में आगे बढ़ना महज औपचारिकता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अत: आपत्ति को बरकरार रखा जाता है और याचिका सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज की जाती है…।’’

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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