तेल अवीव, इजराइल के एक समूह ने देश के उच्चतम न्यायालय से एक समझौते का उल्लंघन करने के आरोप में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू को सजा देने का अनुरोध किया है। इस समझौते के तहत नेतान्याहू पर उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मुकदमे के दौरान न्यायपालिका में दखलअंदाजी करने पर रोक लगाई गई है।
‘मूवमेंट फॉर क्वॉलिटी गवर्नमेंट इन इजराइल’ नामक समूह के इस अनुरोध के बाद नेतान्याहू सरकार और न्यायपालिका के बीच खींचतान बढ़ गई है। सरकार न्यायपालिका में बदलाव के प्रयास कर रही है, जिसका व्यापक रूप से विरोध हो रहा है।
सुशासन की वकालत करने वाला यह समूह न्यायपालिका में सुधारों के प्रयास का पुरजोर विरोध कर रहा है। समूह ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह नेतान्याहू को कानून का सम्मान करने की हिदायत दे और ऐसा नहीं करने पर उन पर जुर्माना लगाए या जेल की सजा सुनाए। समूह ने कहा है कि वह कानून से ऊपर नहीं हैं।
समूह के प्रमुख एलियाद शरगा ने कहा, “एक प्रधानमंत्री जो अदालत व कानूनी प्रावधानों का सम्मान नहीं करता है, वह अराजकतावादी है।”
देश के अटॉर्नी जनरल ने नेतन्याहू को न्यायपालिका में आमूल-चूल परिवर्तन करने की उनकी सरकार की योजना पर अमल करने से रोक दिया है। हितों के टकराव को लेकर हुए समझौते के तहत नेतान्याहू इस योजना पर अमल नहीं करने के लिए बाध्य हैं। उच्चतम न्यायालय ने भी नेतान्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे की सुनवाई करते हुए इसे स्वीकार किया है।
हालांकि नेतान्याहू ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह अटॉर्नी जनरल का फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने देश को संकट से उबारने और “दरार को भरने” का संकल्प लिया।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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