श्रीनगर, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के लोकसभा सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने सोमवार को कहा कि अनुच्छेद 370 को ‘पिछले दरवाजे’ से हटाने की ‘साजिश’ के तहत 2018 में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव में देरी की गई। मेहदी ने मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में संवाददाताओं से कहा ‘‘संविधान कहता है कि किसी भी सीट के खाली होने या विधानसभा भंग होने के छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाने चाहिए। वर्ष 2018 में जब यहां विधानसभा भंग हुई तो सरकार ने चुनाव में देरी की जो अवैध और असंवैधानिक था।’’
श्रीनगर से लोकसभा सांसद मेहदी ने कहा कि ‘‘उस देरी के पीछे एक साजिश थी’’ ताकि विधानसभा का गठन न हो और वे राज्यपाल के हस्ताक्षर से ‘‘पिछले दरवाजे’’ से अनुच्छेद 370 को हटा सकें।
उन्होंने आगे कहा ‘‘यह सबसे बड़ी कानूनी और संवैधानिक लूट थी।’’
जम्मू-कश्मीर के बडगाम और नगरोटा विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनावों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के बारे में पूछे जाने पर मेहदी ने उम्मीद जताई कि बिहार विधानसभा चुनावों के साथ ही उपचुनाव भी होंगे।
उन्होंने तत्कालीन राज्य विधानसभा में बडगाम का तीन बार प्रतिनिधित्व किया था।
उन्होंने कहा ‘‘एक साल से ज्यादा समय हो गया है और बडगाम और नगरोटा के लोग उपचुनावों का इंतजार कर रहे हैं। कल पर्यवेक्षकों के बारे में एक रिपोर्ट आई थी और मुझे उम्मीद है कि वे बिहार विधानसभा चुनावों के साथ ही उपचुनावों की भी घोषणा करेंगे।’’
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बडगाम और गांदेरबल दो विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने बडगाम सीट खाली कर दी थी जिससे इस सीट पर उपचुनाव कराना जरूरी हो गया है।
नगरोटा सीट भाजपा विधायक देवेंद्र सिंह राणा के चुनाव के कुछ ही दिनों बाद निधन के बाद खाली हुई थी। लद्दाख की स्थिति के बारे में पूछे गए एक सवाल पर मेहदी ने कहा कि जो लोग अनुच्छेद 370 के हटने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किये जाने से खुश थे उन्हें ‘‘यह अहसास हो गया है कि यह अधिकार हीनता’’ पूर्ववर्ती राज्य (जम्मू-कश्मीर) के हित में नहीं थी।
मेहदी ने कहा कि केंद्र द्वारा लिये गए फैसलों के खिलाफ असहमति व्यक्त करने या विरोध करने पर गिरफ्तार कर लिया जाता है।
उन्होंने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जिक्र करते हुए कहा ‘‘पीएसए (जन सुरक्षा अधिनियम) और यूएपीए [गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम] कश्मीर में आम बात हो गई है। कुछ लोग जो पिछले कुछ सालों से भाजपा के पक्ष में बातें करते थे आज उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और उनपर एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) जैसे कानून लगा दिए गए हैं।’’
सांसद ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रहित के लिए नहीं बल्कि पार्टी हित में काम कर रही है।
उन्होंने कहा ‘‘यह सभी को स्पष्ट होना चाहिए कि यह शासन राष्ट्रहित नहीं बल्कि पार्टी हित देखता है। जब तक कोई व्यक्ति पार्टी या राज्य उनकी बातों को दोहराता रहता है तब तक उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन अगर वही लोग चाहे वे किसी भी धर्म के हों भाजपा की नीतियों के विरुद्ध बोलते हैं तो भाजपा उन्हें राष्ट्र-विरोधी कहती है और उन पर पीएसए और एनएसए जैसे क़ानून लगा देती है। यह कश्मीर में एक सच्चाई थी और अब यह सच्चाई लद्दाख में भी सामने आ गई है।’’ हालांकि उन्होंने लद्दाख के लोगों की जायज मांगों का समर्थन किया।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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