भुवनेश्वर, ओडिशा मंत्रिमंडल ने गोदावरीश आदर्श विद्यालय (जीएवी) योजना के तहत 2025-26 से तीन वर्षों में 2 200 प्राथमिक विद्यालय स्थापित करने के लिए 12 000 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी। यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दी। माझी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 226 करोड़ रुपये की लागत से क्योंझर जिले के घाटगांव में मां तारिणी मंदिर के सौंदर्यीकरण सहित तीन अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएवी योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय विकसित किया जाएगा।
ओडिशा की पूर्ववर्ती बीजू जनता दल (बीजद) सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया ‘‘पूर्ववर्ती सरकार के 24 साल के शासन में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी। उन्होंने 5टी परिवर्तन के नाम पर विद्यालयों की टूटी-फूटी दीवारों पर सिर्फ रंग-रोगन किया।’’
5टी पहल बीजू जनता दल (बीजद) सरकार का एक शासन मॉडल था जो टीमवर्क ट्रांसपैरेंसी (पारदर्शिता) टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी) टाइम (समय) और ट्रांसफॉर्मेशन (परिवर्तन) पर केंद्रित था।
माझी ने बताया कि राज्य में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने जीएवी योजना को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि जीएवी योजना का उद्देश्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के उद्देश्यों के अनुरूप समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देते हुए पंचायत स्तर पर आदर्श विद्यालय स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 और निपुण ओडिशा के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 2025-26 और 2027-28 के बीच 12 000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 2 200 मॉडल विद्यालयों का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि प्रत्येक स्कूल के लिए अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ रुपये है लेकिन वास्तविक लागत प्रत्येक स्कूल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
माझी ने कहा कि कवि गोदावरीश मिश्र के नाम पर शुरू की गई जीएवी योजना ओडिशा में एक समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है जो समान शैक्षिक अवसरों और प्रत्येक बच्चे के बुनियादी सशक्तिकरण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने घाटगांव स्थित मां तारिणी मंदिर के सौंदर्यीकरण और परिधीय विकास के लिए 226 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की है।
ये कार्य 59.206 एकड़ क्षेत्र में किए जाएंगे और इन्हें 24 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि अनुमान है कि भूमि अधिग्रहण पर 80 करोड़ रुपये खर्च होंगे जबकि 146 करोड़ रुपये 216 बिस्तर वाले अतिथि गृह तीर्थस्थल व्याख्या केंद्र फूड प्लाजा एवं वॉच टावर मार्केट कॉम्प्लेक्स नारियल भंडार 500 लोगों के लिए प्रसाद परोसने का कमरा और क्लॉक रूम सहित विभिन्न सुविधाओं के विकास के लिए उपयोग किए जाएँगे।
माझी ने कहा कि इन सभी कार्यों के पूरा होने के बाद मां तारिणी का मंदिर भारत के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में से एक माना जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मीडिया को यह भी बताया कि व्यापार सुगमता में सुधार के लिए श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) विभाग द्वारा मौजूदा अधिनियमों में संशोधन के दो प्रस्तावों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कारखाना अधिनियम 1948 और ओडिशा दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम 1956 में आवश्यक संशोधन करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार अब 20 या अधिक कर्मचारियों वाली व्यावसायिक इकाइयों को ओडिशा दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम 1956 के तहत पंजीकरण कराना होगा।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दैनिक कार्य समय नौ घंटे से बढ़ाकर दस घंटे कर दिया गया है जिसमें छह घंटे के अंतराल में कम से कम आधे घंटे का विश्राम भी शामिल है। बयान में कहा गया है कि रात में महिला कर्मचारियों के काम करने पर प्रतिबंध हटा दिया गया है। बयान में कहा गया है कि अब महिला कर्मचारियों को उनकी लिखित सहमति से और राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित महिलाओं की सुरक्षा संरक्षा और सम्मान की शर्तों के अधीन रात में काम करने के लिए नियुक्त किया जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि अगर कोई कर्मचारी किसी भी प्रतिष्ठान में किसी भी दिन 10 घंटे से अधिक या किसी भी हफ़्ते में 48 घंटे से अधिक काम करता है तो उसे सामान्य वेतन की दोगुनी दर मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुधार छोटे व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम करेंगे और उद्यमियों को प्रोत्साहन देंगे जिससे कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित करते हुए अधिक आर्थिक अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारियों की कमाई भी बढ़ेगी क्योंकि उन्हें अधिक ओवरटाइम काम करने की अनुमति मिलेगी और संगठित क्षेत्र व कॉर्पोरेट क्षेत्र में महिलाओं के लिए काम में अधिक भागीदारी के अवसर बढ़ेंगे।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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