अमरावती, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करने हेतु प्रौद्योगिकी को शामिल करते हुए नवीन विचार प्रस्तुत करें।
मुख्यमंत्री ने सचिवालय में आयोजित पांचवें जिलाधिकारी सम्मेलन के दूसरे दिन अपने संबोधन में वरिष्ठ अधिकारियों को मुस्तबू नीति को लागू करने का निर्देश दिया। पार्वतीपुरम मन्याम जिले के आदिवासी छात्रों के बीच शुरू किया गया व्यक्तिगत स्वच्छता कार्यक्रम मुस्तबू सभी शिक्षण संस्थानों में लागू किया गया है।
नायडू ने जिलाधिकारियों से कहा ‘‘ सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को लागू करने और परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए नवीन विचार प्रस्तुत करें।’’
उन्होंने पार्वतीपुरम मन्याम जिले के जिलाधिकारी प्रभाकर रेड्डी द्वारा कार्यान्वित मुस्तबू कार्यक्रम की सराहना भी की। मुख्यमंत्री के अनुसार मुस्तबू को लागू करने से लोगों की व्यक्तिगत स्वच्छता पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इस कार्यक्रम को राज्य भर के 12वीं कक्षा तक के सभी शिक्षण संस्थानों में लागू किया जाता है तो लगभग 80 लाख छात्रों को इसका लाभ होगा। ये छात्र अपने माता-पिता से व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने पर बल देंगे जिससे राज्य में दो करोड़ से अधिक लोग प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि इस तरह के नवोन्मेषी विचार जिनमें कोई वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं है समाज पर बहुत बड़ा प्रभाव डालेंगे और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इसी बीच स्वास्थ्य चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव सौरभ गौड़ ने आंध्र प्रदेश की घटती प्रजनन दर (टीएफआर) पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में बाकी देश की तुलना में अधिक तेजी से वृद्धावस्था बढ़ रही है जहां औसत आयु 32.5 वर्ष है जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 वर्ष है।
गौड़ ने कहा कि इससे पहले कि निर्भरता अनुपात बुजुर्ग आबादी की ओर अत्यधिक झुक जाए राज्य के पास 2040 तक ही जनसांख्यिकीय स्थिति में सुधार करने का समय है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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