अदालत में महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। मंच पर आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मौजूद रहे। अपने संबोधन में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 12 साल पहले हमारी बहन निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। इसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरा देश सड़कों पर उतर आया था और ऐसा लग रहा था कि अब महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। लेकिन घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ गई हैं। केजरीवाल ने कहा, “महिलाओं का कहना है कि पुलिस उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस कुछ नहीं करती, क्योंकि ऊपर अमित शाह बैठे हैं, जिन्हें आपकी परवाह नहीं है।”
केजरीवाल ने कहा, “आज से 10 साल पहले आपने मुझे दिल्ली में सरकारी स्कूल, अस्पताल, बिजली और पानी की आपूर्ति को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी दी थी और मैंने उस जिम्मेदारी को पूरा किया। लेकिन 10 साल पहले आपने दिल्ली की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र की भाजपा सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को दी थी, लेकिन उन्होंने यह काम नहीं किया और दिल्ली को बर्बाद कर दिया।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी महिला अदालत को संबोधित किया और कहा: “आखिर कब तक दिल्ली की बेटियां और महिलाएं डर के साये में जिएंगी? आज भी राजधानी में महिलाएं घर से निकलने में सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। हर दिन 3-4 बलात्कार, 11 से ज्यादा अपहरण, एक साल में महिलाओं के खिलाफ 14000 से ज्यादा अपराध। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये भाजपा शासित केंद्र सरकार की हकीकत है जो दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है! दिल्ली में भाजपा शासित केंद्र सरकार का एकमात्र काम दिल्ली के लोगों और महिलाओं को सुरक्षा देना है, लेकिन वह इसमें भी पूरी तरह विफल रही है। आज “महिला अदालत” में मैंने उन महिलाओं की कहानियाँ भी सुनीं जो भाजपा की नाकामी के कारण अपराध की शिकार हुईं। अब महिला अदालत के माध्यम से महिलाएँ खुद अपनी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के लिए आवाज़ उठाएंगी। अब दिल्ली की महिलाएँ चुप नहीं बैठेंगी। वे झांसी की रानी की तरह लड़ेंगी और दिल्ली की कानून-व्यवस्था को बर्बाद करने वाली भाजपा के खिलाफ़ आवाज़ उठाएंगी ।
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