न्यूयॉर्क, एक प्रमुख सामुदायिक संगठन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच1बी वीजा पर 100 000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के बारे में नहीं है बल्कि ‘‘विदेशी विरोधी एजेंडे’’ को आगे बढ़ाने के लिए आव्रजन नीति को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की है।
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा पर 1 00 000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा की है। भारत से जुड़े संगठन ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ ने एच-1बी वीजा पर 1 00 000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने संबंधी ट्रंप के आदेश की कड़ी निंदा की और कहा कि इसकी वजह से घबराहट और अफरा-तफरी है-खासकर उन पेशेवरों में जो विदेश में काम कर रहे हैं या आपात चिकित्सा स्थिति में अपने परिवार से मिलने जा रहे हैं।
‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने सोमवार को एक बयान में कहा कि यह घोषणा ‘‘अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के बारे में नहीं है। यह एक विदेशी-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आव्रजन नीति को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में है। एच-1बी वीजा धारकों को निशाना बनाकर ट्रंप
हमारे आर्थिक भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं और साथ ही भारतीय अमेरिकियों और देश भर के सभी आप्रवासी समुदायों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं।’’
यह संगठन अमेरिका भर में समुदाय के सदस्यों को संगठित एकजुट और निर्वाचित करके भारतीय और दक्षिण एशियाई अमेरिकियों को मजबूत बनाने की दिशा में काम करता है।
उसने कहा कि यह ‘विनाशकारी’ नीति अमेरिका के वैश्विक नेतृत्व के लिए खतरा है अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को संचालित करने वाले बेहद कुशल कार्यबल को कमजोर करती है तथा परिवारों और व्यवसायों दोनों पर असहनीय बोझ डालती है।
पटेल ने कहा कि एच-1बी वीजा पर ट्रंप का 100 000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क उन श्रमिकों और समुदायों पर ‘सीधा हमला’ है जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common