यरुशलम, इजराइल में रिकॉर्ड मतदान के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार के खिलाफ नाराजगी सामने आई है। एग्जिट पोल में हालांकि, किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है और सरकार गठन के लिए कई सप्ताह तक बातचीत करनी पड़ सकती है।एग्जिट पोल के मुताबिक, मौजूदा सरकार के विरोधियों को अगली संसद में स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये दल गठबंधन बनाने के लिए तैयार होंगे या नहीं। इनमें अरब के नेतृत्व वाले दल भी शामिल हैं, जिन्होंने शुरुआती अनुमानों के अनुसार ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है।नेतन्याहू ने बुधवार तड़के खुद को सबसे लंबे समय तक देश का प्रधानमंत्री रहने वाला नेता दर्शाने की कोशिश की।
उन्होंने पिछले तीन वर्षों में इजराइली सेना की उपलब्धियों की सराहना भी की।उन्होंने अरब दलों के साथ गठबंधन की संभावना को देशद्रोह करार दिया। इजराइल की आबादी में अरब समुदाय की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है।नेतन्याहू ने कहा, ‘‘हमें एक मजबूत, दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी सरकार बनानी चाहिए। हमें इजराइल को खतरे में नहीं डालना चाहिए और ऐसी सरकार नहीं बनानी चाहिए जो यहूदी राष्ट्रवाद के विरोधी अरब दलों पर निर्भर हो।’’नेतन्याहू को उनके पूर्व सैन्य प्रमुख और मध्यमार्गी नेता गादी आइजेनकोट से कड़ी चुनौती मिली है। आइजेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ अरब दलों के साथ गठबंधन की संभावना खुली रखी है, लेकिन उनके कुछ अन्य संभावित सहयोगियों ने इससे इनकार किया है।
करीबी मुकाबले से संकेत मिलता है कि नेतन्याहू के विरोधी हमास के नेतृत्व में सात अक्टूबर 2023 को हुए हमले के बाद पैदा हुए गुस्से और शोक का फायदा उठाकर उन्हें निर्णायक रूप से सत्ता से हटाने में सफल नहीं हो सके। उस हमले के बाद तीन साल तक युद्ध की स्थिति बनी रही।मंगलवार के चुनाव में दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर को भी नुकसान हुआ। वह फलस्तीनी हिरासत में लिए गए लोगों का खुलेआम मजाक उड़ाते रहे हैं और गाजा के लोगों को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके हैं।इजराइल के प्रमुख टेलीविजन चैनलों के एग्जिट पोल के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की सीटें 32 से घटकर करीब 27 रह सकती हैं।
नेतन्याहू और आइजेनकोट के नेतृत्व वाले खेमों को करीब 51-51 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि अरब दलों को लगभग 18 सीटें मिल सकती हैं। अंतिम नतीजों के लिए डाक और अन्य अनुपस्थित मतदाताओं के कई लाख मतों की गिनती बाकी है।आइजेनकोट ने सरकार बनाने का संकल्प जताते हुए ‘‘आशा के नए दौर’’ का वादा किया। सरकार गठन में अरब दलों की भूमिका अहम हो सकती है, हालांकि उनके साथ गठबंधन को लेकर विपक्ष में मतभेद हैं।
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग उस दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना होगी। यदि कोई भी पक्ष बहुमत हासिल नहीं कर पाता है, तो अगले साल की शुरुआत में दोबारा चुनाव हो सकते हैं।नेतन्याहू के आलोचकों का आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए गाजा में युद्ध लंबा खींचा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर किया। गाजा में कथित मानवता के खिलाफ अपराधों को लेकर उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट भी जारी है। नेतन्याहू इन आरोपों से इनकार करते हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common