ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत

भुवनेश्वर,  खनन कानून में संशोधन और स्कूली बच्चों की नयी किताबों में गलतियों को लेकर विपक्षी सदस्यों के शोरशराबे के बीच मंगलवार को ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की गई। पहले सदन की कार्यवाही दोपहर डेढ़ बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई  तो विपक्षी विधायकों ने अपनी सीट पर लौटने से इनकार कर दिया। तब विधानसभा उपसभाध्यक्ष भबानी शंकर भोई ने कार्यवाही शाम चार बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

           सत्र विधानसभा के छह पूर्व सदस्यों और नेपाल में अचानक आई बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुआ। इसके तुरंत बाद बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के विधायक आसन के समीप आ गए तथा हाल में संसद में पारित हुए  खान एवं खनिज (विकाव एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम  2026  और स्कूली बच्चों की किताबों में गलतियों को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे।

          बीजद विधायकों ने स्कूली किताबों में गलतियों का विरोध किया। कांग्रेस सदस्यों ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को रद्द करने की मांग की।

          बीजद सदस्यों ने पाठ्यपुस्तक के मुद्दे पर स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।  सदन में शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने विधायकों से अपनी सीट पर लौट जाने की अपील की  लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

           सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बीजद विधायक महात्मा गांधी मार्ग पहुंचे  जहां पार्टी की युवा और छात्र इकाई के सदस्य  विधानसभा घेराव  आंदोलन कर रहे हैं।

           विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने कहा  ‘‘हम स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन में शामिल हुए। स्कूली बच्चों को त्रुटिपूर्ण किताबें बांटने के लिए मंत्री को जवाबदेह ठहराया ही जाना चाहिए।’’

           दोपहर एक बजकर 10 मिनट जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई  तो विपक्ष के सदस्यों ने अपनी सीट पर लौटने से इनकार कर दिया। भोई ने कार्यवाही को चार बजे तक स्थगित करने की घोषणा की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक इरासिस आचार्य ने कार्यवाही में बाधा डालने के लिए विपक्ष की आलोचना की।

           आचार्य ने कहा  ‘‘सरकार ने पाठ्यपुस्तकों में गलती के मामले में कार्रवाई की है। संशोधित किताबें बांटी जा रही हैं। वे (विपक्षी सदस्य) बिना किसी ठोस वजह के हंगामा कर रहे हैं।’’

           सत्र शुरू होने पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूर्व मंत्रियों–डंबरू माझी और सुशांत सिंह  पूर्व मुख्य सचेतक सत्य भूषण साहू और पूर्व सदस्यों– रामामूर्ति गमांगो  हाजी मोहम्मद अयूब खान और शिवाजी माझी के निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किए।

           माझी ने नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में हाल में विनाशकारी बाढ़ में हुई जान-माल की हानि पर भी शोक प्रस्ताव पेश किया।

           विपक्ष के नेता और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक  कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता लक्ष्मण मुंडा ने भी शोक व्यक्त किया। विधानसभा अध्यक्ष ने गहरी संवेदना व्यक्त की और सदन ने दिवंगत आत्माओं के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा।

           विधानसभा का नौ दिवसीय मानसून सत्र तीन अक्टूबर तक चलेगा और इसमें छह अहम विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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