कोविड टीके के लिये वैश्विक आईपीआर माफी के भारत, दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का समर्थन करेगा चीन

बीजिंग, वैश्विक टीका कूटनीति का सक्रिय रूप से अनुसरण कर रहे चीन ने सोमवार को कहा कि वह कोरोना वायरस रोधी टीकों के लिये बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार संबंधी पहलुओं (टीआरआईपीएस) में अस्थायी छूट के भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का “समर्थन” करता है। साथ ही उसने जोर दिया कि वह उन सभी कार्रवाई का समर्थन करेगा जो विकासशील देशों के महामारी के खिलाफ लड़ने में अनुकूल होंगी।

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने पिछले साल अक्टूबर में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को लिखे पत्र में कोविड-19 टीकों से संबंधित कुछ बौद्धिक संपदा प्रावधानों में टीआरआईपीएस छूट की मांग की थी जिससे विकासशील देशों के लोगों की पहुंच जीवन रक्षक दवाओं और उपचारों तक यथाशीघ्र हो सके।

इसके बाद से इस प्रस्ताव को अमेरिका और यूरोपीय संघ में भी समर्थन मिलना शुरू हुआ।

इस महीने के शुरू में, विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक नगोजी ओकोंजा-इवेला सदस्य देशों से अनुरोध किया कि अति आवश्यकता को समझते हुए जल्द से जल्द एक प्रस्ताव पेश कर चर्चा करें जो अस्थायी रूप से कोविड-19 टीकों की प्रौद्योगिकी को संरक्षित करने वाले व्यापार नियमों में छूट दें।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजान ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का सीधा संदर्भ दिये बिना यहां संवाददाताओं को बताया, “चीन कोविड-19 टीकों के लिये बौद्धिक संपदा अधिकार में छूट की विकासशील दुनिया की मांग को पूरी तरह समझता है और उसके पक्ष में हैं।”

उन्होंने कहा, “सबसे बड़े विकासशील देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक जिम्मेदार सदस्य के तौर पर चीन वह सबकुछ करेगा जो बायरस के खिलाफ विकासशील देशों की जंग के अनुकूल होगा तथा उन सभी कार्रवाइयों का समर्थन करेगा जिससे विकासशील देशों को न्यायसंगत तरीके से टीका हासिल करने में मदद मिल सके।”

देश में निर्मित पांच टीकों को आपत इस्तेमाल के लिये मंजूरी देने वाले चीन को हाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अपने पहले टीके साइनोफार्म के लिये मंजूरी मिली है।

झाओ ने कहा कि चीन ने 80 से ज्यादा देशों और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों को टीके की सहायता उपलब्ध कराई है तथा 50 से ज्यादा देशों को टीके का निर्यात किया है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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