नयी दिल्ली, सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने मंगलवार को कहा कि सशस्त्र बलों के लिए खरीद प्रक्रिया समय की जरूरतों के अनुरूप नहीं रही और वास्तविक परिवर्तन के लिए नौकरशाही मामलों में क्रांति की जरूरत है।
सेना प्रमुख ने कहा कि नियमों और विनियमों की “हावी होने वाली प्रकृति” के कारण अधिग्रहण प्रक्रिया में कई प्रक्रियात्मक कमियां आ गई हैं। उन्होंने कहा कि “सूचना-युग” की युद्ध की जरूरतों को “औद्योगिक युग” की प्रक्रियाओं द्वारा बाधित नहीं होने दिया जा सकता है।
‘यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’ में अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने कहा कि सशस्त्र बल अतीत में विकसित “विरासती संरचनाओं” के साथ अगला युद्ध लड़ने और जीतने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं और जरूरत है कि तेज़ी से फैसले करने पर तवज्जो दी जाए।
जनरल नरवणे ने कहा, “दुर्भाग्य से हमारी खरीद प्रक्रिया समय की जरूरतों के अनुरूप नहीं हुई है। हमारे नियमों और विनियमों की हावी होने वाली प्रकृति के कारण अधिग्रहण प्रक्रिया में कई प्रक्रियात्मक खामियां आ गई हैं।”
उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि यहां भी कायापलट किया जाए और सबसे कम बोली लगाने वाले विक्रेता की अवधारणा को खत्म किया जाए। उन्होंने कहा, “हम अतीत से विकसित विरासत संरचनाओं के साथ अगला युद्ध लड़ने और जीतने की उम्मीद नहीं कर सकते। हमारी बल संरचनाएं कुशल , लचीली और नेटवर्कयुक्त होनी चाहिए। उन्हें समकालीन युद्ध क्षेत्र की वास्तविकताओं और चुनौतियों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।”
क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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