विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने कर्तव्य भवन में यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान और ऊर्जा समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर जल्द हस्ताक्षर, पुष्टि और प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।यूरोपीय संसद की ऑस्ट्रियाई सदस्य एंजेलिका विन्ज़िग और राफेल स्टैनकानेली के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के साथ विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार, औद्योगिक विकास और अहम व उभरती तकनीकों में भारत-EU सहयोग को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की।सिंह ने कहा कि FTA को जल्द लागू करना एक सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिए और यूरोपीय संसद से निरंतर समर्थन की भारत की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यवसायों, उपभोक्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करेगा और साथ ही भारत-EU रणनीतिक साझेदारी को और गति देगा। विन्ज़िग ने भारत को यूरोपीय संघ का एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया।
उन्होंने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल के दौरे का मकसद भारत की औद्योगिक और टेक्नोलॉजी नीतियों को बेहतर ढंग से समझना और आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना था। उन्होंने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने, मज़बूत और सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने और ग्रीन व डिजिटल बदलाव को आगे बढ़ाने जैसे साझा हितों पर ज़ोर दिया।सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को ‘विकसित भारत 2047’ विज़न के तहत भारत की रिसर्च और इनोवेशन से जुड़ी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार बड़े असर वाली रिसर्च, रिसर्च को टेक्नोलॉजी और कमर्शियल उत्पादों में बदलने और इंडस्ट्री की ज़्यादा भागीदारी पर ध्यान दे रही है।उन्होंने ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ और €10-बिलियन की रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन पहल का ज़िक्र किया, जिसका मकसद ज़्यादा जोखिम और ज़्यादा असर वाले रिसर्च को सपोर्ट करना और डीप-टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना है।
मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटीरियल्स, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, अगली पीढ़ी के टेलीकम्युनिकेशन और 6G के क्षेत्रों में भारत और EU के बीच ज़्यादा सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजी रिसर्च, प्रैक्टिकल इस्तेमाल, स्किल डेवलपमेंट और एक व्यापक क्वांटम इकोसिस्टम बनाने में सहयोग के मौके देती है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में सिंह ने कहा कि भारत हेल्थकेयर और वैज्ञानिक रिसर्च से जुड़े इस्तेमाल में खास तौर पर दिलचस्पी रखता है, साथ ही इसके ज़िम्मेदार और भरोसेमंद इस्तेमाल को भी सुनिश्चित करना चाहता है।सेमीकंडक्टर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और सुरक्षित व मज़बूत सप्लाई चेन पर EU का फ़ोकस सहयोग के मौके देता है। उन्होंने कहा कि रिसर्च, इनोवेशन, इन्वेस्टमेंट और इकोसिस्टम डेवलपमेंट में भारत की सेमीकंडक्टर पहलों और EU चिप्स फ़्रेमवर्क के बीच तालमेल बिठाया जा सकता है।
सिंह ने साफ़ और ग्रीन टेक्नोलॉजी और जलवायु व पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए भी मज़बूत सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल के तहत प्रगति हुई है, जिसमें वेस्ट-टू-हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, समुद्री प्रदूषण और इलेक्ट्रिक-व्हीकल बैटरी की रीसाइक्लिंग पर मिलकर रिसर्च करने के लिए चार साल में €60 मिलियन का संयुक्त निवेश शामिल है।बैठक में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग टेक्नोलॉजी और टेस्टिंग पर प्रस्तावित भारत-EU इनोवेशन हब पर भी चर्चा हुई। यह प्रस्तावित प्लेटफ़ॉर्म भारत और यूरोपीय संघ की रिसर्च क्षमताओं, टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड्स की विशेषज्ञता और स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक साथ लाएगा।
भारत और EU हाइड्रोजन वैली पर भी जानकारी का आदान-प्रदान कर रहे हैं और हाइड्रोजन से जुड़े सुरक्षा मानकों पर सहयोग की संभावना तलाश रहे हैं। सिंह ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन में सहयोग से ज़्यादा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है, जिसमें मध्यम अवधि में भारत से EU को ग्रीन हाइड्रोजन का संभावित निर्यात भी शामिल है।’होराइज़न यूरोप’ प्रोग्राम के साथ भारत के प्रस्तावित जुड़ाव पर सिंह ने कहा कि इसमें शामिल होने से भारतीय रिसर्चर्स के लिए एडवांस्ड रिसर्च क्षेत्रों में यूरोपीय संस्थानों के साथ काम करने के मौके बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि बातचीत अच्छी चल रही है, हालांकि कुछ कानूनी, वित्तीय और संस्थागत मुद्दों पर अभी भी विचार किया जा रहा है।बैठक में भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की पहलों के कार्यान्वयन की समीक्षा भी की गई और संयुक्त रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और इनोवेशन को बड़े पैमाने पर ले जाने के मौकों पर भी चर्चा हुई।
यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल में नीदरलैंड के मोहम्मद चाहिम, स्पेन के राउल डे ला होज़ क्विंटानो और निकोलस गोंजालेज कैसारेस, डेनमार्क के मोर्टन लोकेगार्ड, एस्टोनिया के ज्यूरी रातास और लिथुआनिया के वर्जिनिजस सिंकेविसियस शामिल थे।भारतीय प्रतिनिधिमंडल में अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे, साथ ही वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।https://x.com/DrJitendraSingh/status/2102368078231437739/photo/1