ट्राई का दूरसंचार कंपनियों के लिए एआई नीति बनाने, घटना की सूचना अनिवार्य करने का प्रस्ताव

नयी दिल्ली, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार नेटवर्क में कृत्रिम मेधा (एआई) के जिम्मेदार उपयाग के लिए एक व्यापक मसौदा रूपरेखा का प्रस्ताव किया। इसके तहत दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को निदेशक मंडल से मंजूर एआई नीतियां अपनानी होंगी, इसके संचालन और सुरक्षा के लिए विशेष समितियां गठित करनी होंगी तथा एआई से जुड़ी गंभीर घटनाओं की जानकारी नियामक को देनी होगी।

संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगने के लिए जारी मसौदा दिशानिर्देश में एआई प्रणाली के उपयोग से होने वाले परिणामों के लिए संबंधित कंपनियों और संस्थाओं को जवाबदेह बनाने का भी प्रस्ताव है। यह जवाबदेही इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि एआई प्रणाली कंपनी ने खुद विकसित की है, किसी तीसरे पक्ष से खरीदी है या बाहरी एजेंसी से तैयार कराई है।

ट्राई ने बयान में कहा कि उसने दूरसंचार नेटवर्क में एआई के जिम्मेदार उपयोग और दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में दिशानिर्देशों का मसौदा संबंधित पक्षों की टिप्पणियों के लिए जारी किया है।

परामर्श पत्र के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एआई का इस्तेमाल करने वाली दूरसंचार कंपनियों और अन्य अधिकृत संस्थाओं को अपनी एआई प्रणालियों को तीन श्रेणियों- उच्च, मध्यम और कम जोखिम में बांटना होगा। यह वर्गीकरण नेटवर्क संचालन, वित्तीय एवं परिचालन नतीजों और उपभोक्ताओं पर संभावित असर के आधार पर किया जाएगा।

प्रत्येक संस्था को एआई के इस्तेमाल के लिए अपनी आंतरिक नीति बनानी होगी। इसे निदेशक मंडल या समकक्ष संचालन निकाय की मंजूरी लेनी होगी। इस नीति में जोखिम का वर्गीकरण, एआई प्रणाली के इस्तेमाल की मंजूरी, किसी घटना से निपटने की प्रक्रिया, मानवीय निगरानी, आंकड़ों का प्रबंधन और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे जैसे पहलू शामिल होंगे।

परामर्श पत्र में कहा गया, ‘‘जोखिम कम करने के लिए सभी एआई प्रणालियों पर पहले से तय व्यवस्था के तहत उचित मानवीय निगरानी रखी जाएगी।’’

नियामक ने एआई से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता के आधार पर चार श्रेणियों- अत्यंत गंभीर, गंभीर, मध्यम और कम में बांटने का प्रस्ताव किया है। अत्यंत गंभीर और गंभीर घटनाओं की जानकारी ट्राई को देना अनिवार्य होगा।

मसौदे में कहा गया , ‘‘अत्यंत गंभीर और गंभीर एआई घटनाओं की जानकारी ट्राई को निर्धारित प्रारूप, तरीके और समयसीमा के भीतर देनी होगी।’’

दूरसंचार कंपनियों को एआई से जुड़ी घटनाओं और एआई के कारण उपभोक्ताओं को हुए नुकसान से संबंधित शिकायतों का केंद्रीय डेटाबेस भी रखना होगा। इसके साथ ही ऐसी घटनाओं और शिकायतों की जांच, नुकसान कम करने और समाधान के लिए व्यवस्था करनी होगी। दूरसंचार नियामक ने कहा कि मौजूदा समय में दूरसंचार नेटवर्क और सेवाओं में एआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

ट्राई ने कहा, ‘‘दूरसंचार क्षेत्र में भारत के एआई संचालन से जुड़े दिशानिर्देशों को एकसमान और जिम्मेदारी के साथ लागू करने तथा इस व्यवस्था में स्पष्टता, निश्चितता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उसने संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श के बाद दूरसंचार नेटवर्क में एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल और दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिशानिर्देश बनाने का फैसला किया है।’’

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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