मुंबई, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुंबई इकाई के अध्यक्ष अमित साटम ने करजत में प्रस्तावित 3,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि पर्यावरण संबंधी चिंताओं की बात करना विपक्षी नेताओं के लिए ‘फैशन’ बन गया है, जबकि उन्हें स्वच्छ ऊर्जा की बुनियादी समझ भी नहीं है।
साटम ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि मध्य वैतरणा बांध परियोजना के लिए क्षतिपूरक वनीकरण के तहत दो लाख पेड़ लगाने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कभी लगाया ही नहीं गया। उस समय अविभाजित शिवसेना के नेतृत्व वाला बृह्नमुंबई महानगरपालिका प्रशासन इस परियोजना को पूरा कर रहा था।
साटम ने दावा किया कि ये पेड़ बीड जिले में लगाए जाने थे।
भाजपा नेता की यह टिप्पणी शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की ओर से परियोजना का कड़ा विरोध किए जाने के बीच आई है। दोनों नेताओं ने हाल ही में करजत का दौरा कर गुजरात की कंपनी टोरेंट पावर की प्रस्तावित परियोजना के स्थल का निरीक्षण किया था और पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई थी।
प्रस्तावित परियोजना अभयारण्य से 16 किलोमीटर और भीमाशंकर मंदिर से 20 किलोमीटर दूर है। इससे राज्य और अन्य क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है।
साटम ने कहा कि सतत विकास का अर्थ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हुए बुनियादी ढांचे का विकास करना और यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्परिणाम न भुगतने पड़ें।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए साटम ने कहा, ‘‘लोगों ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं को फैशन बना लिया है। ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास की बात करना फैशन बन गया है। हालांकि, नेताओं, अभिनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पहले यह समझना चाहिए कि ‘नेट जीरो’, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास का वास्तव में क्या मतलब है।’’
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