हैदराबाद, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि राज्य सरकार पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है तथा उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रति मिलने के बाद 23 अक्टूबर को होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना सरकार की उस याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया जिसमें स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों को 42 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी सरकारी आदेश पर रोक लगाने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।
विक्रमार्क ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा ‘‘कांग्रेस पार्टी और सरकार पिछड़ी जातियों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रति प्राप्त होते ही इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और 23 अक्टूबर को होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में निर्णय किया जाएगा।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार ने 2018 के स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान कानून के माध्यम से कुल आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा लगा दी थी जिसे बाद में कांग्रेस सरकार ने निरस्त कर दिया था।
विक्रमार्क ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही सभी आवश्यक कदम उठाए हैं जिनमें मंत्रिमंडल प्रस्ताव सर्वेक्षण एक समर्पित आयोग का गठन और विधानसभा की सर्वसम्मति से मंजूरी प्राप्त करना शामिल है।
उन्होंने आरोप लगाया ‘‘फिर भी केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार महीनों से पिछड़ा वर्ग आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन में बाधा डाल रही है।’’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और तेलंगाना के सभी राजनीतिक दल विधेयक की मंजूरी के लिए दबाव बनाने के लिए दिल्ली जाने को तैयार हैं लेकिन केंद्र ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया है।
विक्रमार्क ने कहा ‘‘पिछड़ा वर्ग विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू) और प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) से मिलने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की अनुमति मांगने के लिए केंद्र को कई-बार पत्र लिखने के बावजूद मंजूरी नहीं दी गई है।’’
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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