आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में एक कठपुतली मुख्यमंत्री बना दिया है, जिसके पति बिना किसी पद के सरकारी अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आप दिल्ली प्रभारी सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार ने देश को लोकतंत्र की जगह ‘पर्ची तंत्र’ में बदल दिया है। भारद्वाज ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने अपने बड़े नेताओं को दरकिनार कर पर्ची सिस्टम के जरिए सीएम बनाना शुरू कर दिया।
दिल्ली में भी भाजपा ने पर्ची सिस्टम के जरिए सीएम बनाया और अपने बड़े नेताओं को दरकिनार कर दिया। अब सीएम रेखा गुप्ता जी ने भी साबित कर दिया है कि वह भी सिर्फ रबर स्टैंप हैं और सारा काम उनके पति मनीष गुप्ता देख रहे हैं।” दिल्ली कोई ‘फुलेरा की पंचायत’ नहीं है। भाजपा दिल्ली अध्यक्ष विजेंद्र सचदेवा को बताना चाहिए कि सीएम रेखा गुप्ता के पति मनीष गुप्ता सरकार में किस पद पर हैं और यदि नहीं हैं, तो वह किस आधार पर अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं? मुख्यमंत्री पद की शपथ रेखा गुप्ता जी ने ली थी, उनके पति ने नहीं।
दिल्ली में ऐसा नहीं चलेगा, सौरभ भारद्वाज ने कहा। नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने एक्स पर एक तस्वीर साझा की और लिखा कि “जो व्यक्ति एमसीडी, डीजेबी, पीडब्ल्यूडी और डीयूएसआईबी के अधिकारियों की बैठक ले रहा है, वह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पति मनीष गुप्ता हैं। “पहले हम सुनते थे कि अगर गांव में कोई महिला सरपंच चुनी जाती है, तो सारा सरकारी काम उसका पति संभालेगा। कहा जाता था कि गांव की महिलाओं को सरकारी काम संभालना नहीं आता है, इसलिए काम ‘सरपंच-पति’ संभालेंगे।
लेकिन इस प्रथा का विरोध किया गया, महिला सरपंचों को प्रशिक्षण दिया जाने लगा ताकि वे अपनी ज़िम्मेदारी संभाल सकें। लेकिन देश के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ होगा कि कोई महिला मुख्यमंत्री बनी हो और सारा सरकारी काम उसका पति संभाल रहा हो। क्या रेखा गुप्ता को सरकारी काम संभालना नहीं आता? क्या यही वजह है कि दिल्ली में हर रोज़ लंबे-लंबे बिजली के कट लगते हैं? क्या रेखा जी बिजली कंपनियों को नहीं संभाल पाती हैं? क्या यही वजह है कि निजी स्कूलों की फ़ीस बढ़ती जा रही है? क्या रेखा जी शिक्षा विभाग नहीं संभाल पाती हैं?
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