दिल्ली में बीएस-6 और पीयूसी नियम लागू होने के बाद यात्रियों में बढ़ी जागरूकता

नयी दिल्ली,  दिल्ली में प्रदूषण के मद्देनजर बीएस-6 मानकों का पालन और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के एक दिन बाद राष्ट्रीय राजधानी में अंतरराज्यीय सीमा पर चौकियों और पेट्रोल पंपों पर यात्री काफी जागरूक नजर आए  वहीं कई लोग ईंधन भरवाने से पहले अपने वाहन के दस्तावेज स्वेच्छा से पेश कर रहे थे।

            ‘दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन’ (डीपीडीए) के अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया ने पीटीआई-भाषा को बताया कि प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणन केंद्रों पर कतारों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ  लेकिन कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में ईंधन की बिक्री प्रभावित हुई।

            उन्होंने कहा “पहले यह अनिश्चित था कि ‘नो पीयूसी  नो फ्यूल (पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं)’ नियम कब तक लागू रहेगा  लेकिन अब यह स्पष्ट है कि यह ‘क्रमिक प्रतिबद्धता कार्य बल’ (ग्रैप) 4 लागू होने तक यह नियम प्रभावी रहेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में बिक्री में गिरावट देखी गई। बदरपुर के पेट्रोल पंप मालिकों ने कल बिक्री में गिरावट दर्ज कराई थी और यह रुझान जारी है।”

             ‘नो पीयूसी  नो फ्यूल’ नियम के तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) नहीं है  उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जा रहा है।

             हालांकि  सिंघानिया ने कहा कि नियम के अनुपालन स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा   ईंधन भरवाने आ रहे वाहन चालक स्वयं ही अपना पीयूसी प्रमाणपत्र दिखा रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है।

            इन नियमों के लागू होने बावजूद शहर में जांच पूरी तरह से समान रूप से लागू नहीं हो पाई है। यात्रियों ने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार को वाहनों के दस्तावेजों की जांच नहीं की गई।

            रोहतक मार्ग पर एक पेट्रोल पंप पर मौजूद पीयूष ने बताया कि उन्हें पीयूसी प्रमाणपत्र दिखाए बिना ही ईंधन मिल गया और वहां पर कोई पुलिस या प्रवर्तन कर्मी नजर नहीं आए। वहीं  गुलाबी बाग से अपने कार्यस्थल जा रहे भूषण सिंह ने कहा कि वह जिस पेट्रोल पंप पर गए  वहां की स्थिति “किसी अन्य दिन जैसी ही” थी।

            हालांकि  शहर के प्रवेश बिंदुओं  टोल प्लाजा और पेट्रोल पंपों पर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें पीयूसी प्रमाणपत्र और बीएस-6 अनुपालन की जांच के लिए तैनात हैं।

            इसी के साथ प्रमुख चौराहों पर दस्तावेजों का सत्यापन करने और चालान जारी करने के लिए ट्रैफिक कर्मियों को स्मार्ट नंबर प्लेट पहचान उपकरणों के साथ तैनात किया गया है। जांच के दौरान कुछ मोटर चालकों ने नरमी बरतने का अनुरोध भी किया।     

            ट्रैफिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा  “टोल प्लाजा के पास तैनाती हमेशा रणनीतिक होती है।

            उन्होंने कहा जब वाहन चालक प्रवर्तन टीमों को टोल प्लाजा के पास देखते हैं तो वे अपने वाहन की गति धीमी कर देते हैं। इससे ट्रैफिक कर्मियों को उन वाहनों को रोककर बिना ट्रैफिक जाम किये दस्तावेजों की जांच करने में आसानी होती है।

            अधिकारी ने बताया कि “हमने दिल्ली-उप्र और हरियाणा-दिल्ली सीमा पर कई जगह सूचना बोर्ड लगाए हैं जिनमें हाल ही में लागू ग्रैप-4 के नियम और विभिन्न मानकों की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि जागरूकता के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित करना है।”

            अधिकारी ने कहा “दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की 100 से अधिक टीमें एक्सप्रेसवे  राजमार्गों और सीमा क्षेत्रों समेत संवेदनशील प्रवेश और निकास बिंदुओं पर तैनात हैं। इन टीमों का काम वाहन दस्तावेजों की जांच करना  प्रदूषण मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करना और प्रतिबंधित वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकना है।”

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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