दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस कदम को रोकने से इनकार कर दिया जिसके तहत भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से BSES राजधानी पावर लिमिटेड और BSES यमुना पावर लिमिटेड का ऑडिट कराया जाना था।
वेकेशन बेंच में बैठे जस्टिस तेजस करिया ने दो बिजली वितरण कंपनियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस चरण में उनकी चुनौती स्वीकार्य नहीं है क्योंकि प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है।
कोर्ट ने गौर किया कि दिल्ली सरकार का 6 जून का नोटिस, जो CAG अधिनियम की धारा 20(3) के तहत जारी किया गया था, उसमें केवल ऑडिट का प्रस्ताव था और कंपनियों को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया गया था। चूंकि नोटिस में कंपनियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया था, इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला।
याचिका को समय से पहले (premature) मानते हुए, कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच पहले सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। अंतिम निर्णय लेने से पहले प्राधिकारी को कंपनियों को अपनी बात रखने का अवसर देना चाहिए और उनके तर्कों पर विचार करना चाहिए।
कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि संबंधित प्राधिकारी को इस मामले पर स्वतंत्र रूप से और इसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना चाहिए, बिना आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए।