नाटो के आगामी शिखर सम्मेलन में यूक्रेन का समूह में शामिल होना सबसे बड़ी चुनौती

वाशिंगटन, रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहने के बीच इस सप्ताह लिथुआनिया के विल्नियस में होने वाले ‘नाटो’ के शिखर सम्मेलन में इस समूह के देशों की एकजुटता की परीक्षा होगी।
दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन ‘उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन’ (नाटो) स्वीडन को अपने 32वें सदस्य के रूप में शामिल करने के समझौते पर पहुंचने को लेकर गहन विचार-विमर्श कर रहा है।
सदस्य राष्ट्रों द्वारा किया जाना वाला सैन्य खर्च दीर्घकालिक लक्ष्यों से पीछे है। वहीं, नाटो के अगले नेता के रूप में किसे काम करना चाहिए, इस नतीजे पर पहुंचने में असमर्थता के कारण वर्तमान महासचिव का कार्यकाल एक अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाना पड़ा था।
साथ ही सम्मेलन के दौरान यूक्रेन का नाटो में शामिल होना सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। कुछ लोगों का मानना है कि यूक्रेन को नाटो का हिस्सा बनाने से वर्षों पहले किया गया एक वादा पूरा हो सकता है।
वहीं, कुछ लोग यूक्रेन को नाटो में शामिल करने के कदम को रूस को उकसाने तथा विवाद को और गहराने के तौर पर देखते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ‘सीएनएन’ को दिए गए साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह (यूक्रेन) नाटो की सदस्यता के लिए तैयार है।’’
उन्होंने कहा कि नाटो में शामिल होने के लिए देशों को ‘‘लोकतंत्रीकरण से लेकर कई अन्य मुद्दों पर खरा उतरना होता है।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन को खुद की रक्षा करने के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा सहायता प्रदान करनी चाहिए, जैसे कि इजराइल के मामले में किया गया।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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