पढ़ाई के लिए एआई के इस्तेमाल का सही तरीका

सिडनी, कृत्रिम मेधा (एआई) ने हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रों को ऐसा संसाधन उपलब्ध कराया है जो संभावित रूप से ‘‘उनका पूरा काम कर सकता है’’। इससे असाइनमेंट जमा करने का तत्काल तनाव कम हो सकता है लेकिन लंबे समय में उनकी सीखने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्र साल के अंत में होने वाली परीक्षाओं की तैयारी में जुट रहे हैं। ऐसे में वे अपनी पढ़ाई में एआई को शामिल करने के तरीके तलाश सकते हैं। मैं सीखने की प्रक्रिया के विज्ञान पर शोध करता हूं।

मेरे हालिया शोध के अनुसार छात्रों को अपनी पढ़ाई में मदद के लिए एआई का इस्तेमाल करने से पहले बुनियादी ज्ञान और कौशल में महारत हासिल करनी चाहिए।एक अध्ययन के अनुसार पढ़ाई के दरान चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट का इस्तेमाल सीखने प्रेरणा आलोचनात्मक एवं रचनात्मक सोच को बढ़ावा दे सकता है और मानसिक प्रयास को कम कर सकता है। अन्य समीक्षाओं में कहा गया है कि एआई सीखने की प्रक्रिया को प्रत्येक छात्र की जरूरत के अनुरूप ढालने समय पर प्रतिक्रिया देने और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि कुछ शोधकर्ताओं ने पहले बताए गए अध्ययनों में कमजोर शोध पद्धतियों और पारदर्शिता की कमी के कारण इन दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

इसका यह मतलब नहीं है कि छात्रों को पढ़ाई के लिए एआई का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। लेकिन उन्हें इससे जुड़े जोखिमों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।इन जोखिमों में से एक है ‘कॉग्निटिव ऑफलोडिंग’ यानी सोचने की जिम्मेदारी दूसरे पर डाल देना। ऐसा तब होता है जब छात्र अपना काम पूरा करने के लिए एआई पर इतने निर्भर हो जाते हैं कि पूरी तरह उसी से सोचने का काम करवाने लगते हैं। जो छात्र नियमित रूप से सोचने और सीखने का काम एआई को सौंप देते हैं वे विषय पर वास्तव में अच्छी पकड़ बनाने से पहले ही पढ़ाई छोड़ सकते हैं।‘कॉग्निटिव ऑफलोडिंग’ के इस जोखिम को देखते हुए परीक्षा की तैयारी के हर चरण में एआई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खासकर अभ्यास परीक्षाओं के दौरान इससे बचना चाहिए।

शोध बताते हैं कि मॉक टेस्ट देते समय वास्तविक परीक्षा जैसी परिस्थितियां बनाना सबसे अच्छा होता है। ज्यादातर मामलों में इसका मतलब है कि लैपटॉप बंद कर दें फोन दूर रख दें परीक्षा की निर्धारित अवधि के अनुसार टाइमर लगाएं और देखें कि आप कितनी जानकारी खुद याद करके लिख सकते हैं। अगर आप अभ्यास परीक्षाओं में मदद के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं तो इससे आपको अपनी तैयारी को लेकर गलत आत्मविश्वास हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एआई अस्थायी रूप से आपके प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है। लेकिन वास्तविक परीक्षा का सामना करने पर आपका प्रदर्शन गिर सकता है जिससे आपकी तैयारी के वास्तविक स्तर का पता चलता है।

जून में प्रकाशित चीन के एक अध्ययन में देखा गया कि छात्रों के एआई इस्तेमाल का उनकी समग्र पढ़ाई पर क्या असर पड़ता है। नतीजों से पता चला कि एआई के इस्तेमाल से छात्रों के गृहकार्य के अंक बेहतर हुए लेकिन छह महीने की अवधि में उनकी मासिक परीक्षाओं के अंक लगभग 20 प्रतिशत गिर गए। ऐसे में सवाल उठता है कि पढ़ाई में मदद के लिए एआई का प्रभावी इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है

पढ़ाई से जुड़ा कोई सवाल एआई से पूछने से पहले आपको उस विषय की जानकारी खुद याद करने समझाने सवाल हल करने सारांश बनाने या अपने शब्दों में लिखने की कोशिश करनी चाहिए। जब आप यह साबित कर दें कि आप विषयवस्तु को सही ढंग से खुद याद कर सकते हैं तब अपने नोट्स व्यवस्थित करने और उनमें छूटी हुई जानकारियों की पहचान करने के लिए एआई की मदद ले सकते हैं।

अगर आप अपनी तैयारी को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो एआई से ऐसे अभ्यास प्रश्न तैयार करने को कह सकते हैं जिनका कठिनाई स्तर धीरे-धीरे बढ़ता जाए। इसके लिए आप यह निर्देश दे सकते हैं: ‘‘इस विषय पर परीक्षा के प्रारूप वाले पांच सवाल तैयार करें। हर सवाल पिछले सवाल से अधिक कठिन होना चाहिए। जब तक मैं हर सवाल का जवाब देने की कोशिश न कर लूं तब तक उसके उत्तर न बताएं।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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