नयी दिल्ली, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने कहा कि भारत को 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता 91 गीगावाट बढ़ाने के लिए 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर 100 गीगावाट के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अनुमानित निवेश के साथ-साथ निजी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी भी जरूरी है।
प्रसाद ने ‘भारतीय बिजली क्षेत्र को एआई (कृत्रिम मेधा) सक्षम बनाने’ विषय पर सीईए के विचार-मंथन कार्यक्रम में कहा कि भारत की मौजूदा स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता करीब 8.8 गीगावाट है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा बिजली का एक स्थिर स्रोत है और भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2030-31 तक बढ़कर 22 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1000 मेगावाट) होने की उम्मीद है।
चेयरमैन ने कहा कि भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में से 46 गीगावाट क्षमता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों (जेवी) से आएगी। प्रसाद ने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षमता से बिजली की अधिकतम मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। यह मांग 2024-25 के 250 गीगावाट से बढ़कर 2035-36 तक 459 गीगावाट पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि 274 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से बिजली उत्पादन में केवल 29.2 प्रतिशत का योगदान मिलता है जबकि परमाणु ऊर्जा चौबीसों घंटे बिजली की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) राष्ट्रीय बिजली नीति से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार को सलाह देता है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common