नयी दिल्ली, समुद्र की सतह से लिये गये एक लीटर पानी से निकाले गये पर्यावरण डीएनए या ईडीएनए प्रवाल भित्ति (कोरल रीफ) की जैव विविधता को मापने के लिए अधिक प्रभावी और सटीक तरीका मुहैया कराते हैं। एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है।
ईडीएनए से आशय उन डीएनए से है, जो प्राणी त्वचा, अपशिष्ट आदि के माध्यम से पर्यावरण में छोड़ते हैं।
ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (ओआईएसटी), जापान के शोध ने प्रत्यक्ष अवलोकन के लिए वैज्ञानिक स्कूबा डाइविंग या स्नॉर्कलिंग पर निर्भर रहने के बजाय बड़े पैमाने पर प्रवाल भित्तियों के व्यापक सर्वेक्षण का मार्ग प्रशस्त किया।
वैज्ञानिक गोताखोरों ने समुद्र के एक ही क्षेत्र में किए गए अवलोकनों के माध्यम से काम करने की विधि की पुष्टि की है। पत्रिका ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी: बायलॉजिकल साइंसेज’ में इस विधि की जानकारी दी गयी है। वैश्विक तापमान वृद्धि और अन्य कारकों से अनेक प्रवाल भित्तियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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