यरुशलम, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में बनने जा रही दक्षिणपंथी रुख वाली सरकार ने पश्चिम तट पर यहूदी बस्तियों के विस्तार को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा है। नयी सरकार बनाने वाले गठबंधन ने संकल्प लिया है कि वह अवैध रूप से बने दर्जनों चौकियों और कब्जा की गई जमीन को सरकार में शामिल अतिराष्ट्रवादी साझेदारों से हुए समझौते के तहत वैध करेगी।
नयी सरकार के शपथ लेने से एक दिन पहले गठबंधन समझौते को सार्वजनिक किया गया जिसमें ‘एलजीबीटी’ लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव का जिक्र किया गया है। इसके साथ ही अति रुढिवादी लोगों को काम के बजाय पढ़ाई करने पर आकर्षक मानदेय देने की बात की गई है।
गठबंधन समझौते ने नेतन्याहू सरकार की तूफानी शुरुआत का संकेत किया है जिसकी उम्मीद की जा रही है।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने बुधवार को नयी सरकार की नीतियों से जुड़े लंबे-चौड़े दिशानिर्देश जारी किये जिसमें सबसे ऊपर गलीली, निगेव, गोलान हाइट्स और जूडिया व समारिया की इजराइली भूमि पर बस्तियों का विस्तार और विकास शामिल है। पार्टी द्वारा उल्लेखित इलाकों के नाम पश्चिमी तट के बाइबल कालीन स्थानों के नाम हैं।
इजराइल ने वर्ष 1967 में गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम के साथ पश्चिमी तट पर कब्जा कर लिया था। फलस्तीनी भविष्य के अपने देश के लिए पश्चिमी तट को चाहते हैं। इजराइल ने इस क्षेत्र में यहूदी बस्तियां बसा दी हैं जिनमें करीब 50 हजार इजराइली करीब 25 लाख फलस्तीनियों के पास रहते हैं।
अधिकतर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि पश्चिमी तट पर इजरायली बस्तियां अवैध और फलस्तीन के साथ शांति में बाधक हैं।
नेतन्याहू की नयी सरकार इजराइल के इतिहास में सबसे अधिक धार्मिक और कट्टर रुख रखने वाली सरकार है, जिसमें अति रूढ़िवादी पार्टियां, अति राष्ट्रवादी धार्मिक गुट और उनकी लिकुड पार्टी शामिल हो रही है। नयी सरकार बृहस्पतिवार को शपथ लेगी।
नेतन्याहू वर्ष 2009 से 2021 तक इजराइल के प्रधानमंत्री थे और पिछले साल सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी कर रहे हैं। वह ऐसे समय सत्ता संभाल रहे हैं जब उनके खिलाफ रिश्वत लेने, भरोसे को तोड़ने और धोखाधड़ी के मामले में सुनवाई हो रही है। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Associated Press (AP)