फुकुशिमा संयंत्र का शोधित जल समुद्र में छोड़ने की योजना को लेकर आईएईए प्रमुख की आलोचना की गई

सियोल, दक्षिण कोरिया के विपक्षी सांसदों ने क्षतिग्रस्त फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र से शोधित अपशिष्ट जल समुद्र में छोड़ने की जापान की योजना को मंजूरी देने को लेकर संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी की कड़ी निंदा की है।
विपक्षी सांसदों ने ग्रॉसी से सियोल में मुलाकात की, जिस दौरान प्रदर्शनकारी बैठक स्थल के बाहर नारेबाजी कर रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक ग्रॉसी सरकारी अधिकारियों और आलोचकों के साथ बातचीत करने तथा खाद्य सुरक्षा के बारे में लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए सप्ताहांत में दक्षिण कोरिया पहुंचे।
आईएईए ने अपशिष्ट जल समुद्र में छोड़ने की योजना पर पिछले सप्ताह अंतिम रिपोर्ट में अपना निष्कर्ष दिया था। इसमें कहा गया है कि जल को काफी हद तक शोधित करने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें अब भी कुछ रेडियोधर्मिता है। जल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और इसका पर्यावरण तथा स्वास्थ्य पर प्रभाव नगण्य होगा।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों के साथ अपनी बैठक में ग्रॉसी ने कहा कि जापान की योजनाओं पर आईएईए की समीक्षा ‘‘पारदर्शी’’ और ‘‘वैज्ञानिक’’ शोध पर आधारित थी।
उन्होंने जापान की योजनाएं वास्तविकता में कैसे काम करेंगी इस बात को लेकर उत्पन्न चिंताओं को स्वीकार किया और कहा कि आईएईए फुकुशिमा में एक स्थायी कार्यालय स्थापित करेगा, ताकि अगले तीन दशकों तक वह अपशिष्ट जल छोड़े जाने की योजना पर करीबी नजर रख पाए।
सांसदों ने आईएईए की समीक्षा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इसमें अपशिष्ट जल छोड़े जाने के दीर्घकालिक पर्यावरणीय व स्वास्थ्य प्रभावों की उपेक्षा की गई है। उन्होंने आगाह किया कि यह अन्य देशों को समुद्र में परमाणु अपशिष्ट का निपटारा करने के लिए प्रोत्साहित करने की एक खराब उदाहरण स्थापित कर सकता है।
पार्टी ने जापान के साथ संबंध सुधारने की कोशिश में लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने के लिए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल की सरकार की भी आलोचना की।
आईएईए अधिकारियों ने 2022 की शुरुआत से जापान की कई यात्राएं की हैं, उन्होंने लगातार यह स्पष्ट किया है कि अपशिष्ट जल समुद्र में छोड़ने के बारे में कोई फैसला जापान सरकार ही लेगी। मार्च 2011 में आये भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा दाइची संयंत्र की ‘कूलिंग प्रणाली’ को नष्ट कर दिया था जिससे तीन रिएक्टर पिघल गए थे और बड़ी मात्रा में रेडिएशन फैला था।
संयंत्र का शोधित जल समुद्र में छोड़े जाने की योजना का दक्षिण कोरिया, चीन और कुछ प्रशांत द्वीप राष्ट्र भी सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक कारणों से विरोध कर रहे हैं।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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