बचपन में कैंसर से होने वाली मौतों में 94 प्रतिशत मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में: अध्ययन

नयी दिल्ली, बचपन में कैंसर से होने वाली मौतों में से 94 प्रतिशत मौत और कर्क रोग के 85 प्रतिशत नए मामले कम एवं मध्यम आय वाले देशों में होते हैं जिससे स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और उपचार में असमानताओं का पता चलता है। यह बात ‘लैंसेट’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में कही गई है। अध्ययन के अनुसार 2023 में बच्चों में कैंसर से हुई कुल मौतों में से भारत में 17 000 चीन में 16 000 और नाइजीरिया तथा पाकिस्तान में लगभग नौ-नौ हजार मौत हुईं।

‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीजेज इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी’ (जीबीडी) के डेटा के विश्लेषण के अनुसार 2023 में दुनिया भर में बचपन में कैंसर के 3 77 000 नए मामले सामने आए जिसके परिणामस्वरूप लगभग 1 44 000 मौतें हुईं। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि दुनिया भर में बच्चों में कैंसर से होने वाली मौतों में 1990 के 1.97 लाख के मुकाबले 27 प्रतिशत की कमी आई है लेकिन अफ्रीका में इनमें 55.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने कहा कि बचपन का कैंसर बच्चों की मृत्यु का आठवां सबसे बड़ा कारण पाया गया और यह स्थिति उन जगहों पर कहीं ज़्यादा है जहां संसाधनों की कमी है। भारत सहित कम-मध्यम सामाजिक-जनसांख्यिकीय सूचकांक वाले देशों में 2023 में सभी आयु वर्गों में वैश्विक कैंसर मौतों में बचपन के कैंसर का योगदान ग्यारहवां सबसे अधिक पाया गया।

अनुसंधाकर्ताओं ने लिखा ‘‘बचपन के कैंसर का अधिकांश असर उन जगहों पर देखने को मिला जहां संसाधन सीमित थे जिनमें 85.1 प्रतिशत मामले और 94.1 प्रतिशत मौत के मामले विश्व बैंक के वर्गीकरण के अनुसार कम आय वाले निम्न-मध्यम आय वाले और उच्च-मध्यम आय वाले देशों में देखने को मिले।’’ रिपोर्ट के अनुसार ल्यूकेमिया के कारण होने वाली मौत (45 900) दुनिया भर में बच्चों में होने वाली कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे बड़ा योगदान देने वाली पाई गईं। इसके बाद मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का कैंसर (23 200) और ‘नॉन-हॉजकिन लिंफोमा’ (15 200 लसीका तंत्र का कैंसर) का स्थान रहा।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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