बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग ठुकराई

पटना, बिहार सरकार ने करीब एक दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून सभी दलों को साथ लेकर राज्य विधानसभा में पारित किया गया था। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद जो सत्तारूढ़ राजग का हिस्सा हैं ने नीति की समीक्षा की मांग करते हुए कहा था कि इससे राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।

संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह कानून राज्य विधानमंडल में सभी दलों को साथ लेकर पारित किया गया था और इसकी समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं उठता। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने भी समीक्षा की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इसकी कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक मांझी ने बुधवार को कहा था कि शराबबंदी से राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा ‘‘प्रतिबंध के बावजूद पड़ोसी राज्यों से महंगी शराब की ‘होम डिलीवरी’ धड़ल्ले से हो रही है। जनता का पैसा बाहर जा रहा है जिस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।’’ मांझी ने दावा किया ‘‘जहां अमीर लोग बिना किसी परेशानी के महंगी शराब खरीद सकते हैं वहीं गरीब जहरीली शराब पीने को मजबूर हो जाते हैं। इसका असर खासकर दलित समुदाय विशेष रूप से भुइयां मुसहरों पर पड़ रहा है।’’

मधुबनी से विधायक आनंद ने कहा कि शराब सेवन के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना पूर्ण प्रतिबंध से अधिक प्रभावी हो सकता है। उन्होंने कहा ‘‘कानून रहना चाहिए या नहीं यह अलग विषय है और यह मंत्रिमंडल का विशेषाधिकार है। हालांकि मेरा मानना है कि इस कानून के कारण राज्य को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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