नयी दिल्ली, बैंकिंग रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने के लिए आधुनिक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराने वाला बैंकर बही साक्ष्य अधिनियम 2026 एक अक्टूबर से लागू हो जाएगा। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि 10 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिये एक अक्टूबर 2026 को इस कानून के प्रावधानों के लागू होने की तारीख तय की गई है। राष्ट्रपति ने पिछले महीने इस कानून को मंजूरी दी थी।
यह कानून समकालीन बैंकिंग गतिविधियों के अनुरूप बैंकिंग रिकॉर्ड के साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल के लिए आधुनिक ढांचा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि कानून में प्रौद्योगिकी-तटस्थ दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके तहत भौतिक इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल वर्चुअल क्लाउड आधारित और अन्य आधुनिक स्वरूपों में रखे गए बैंकिंग रिकॉर्ड को मान्यता दी गई है।
इसमें बैंकिंग रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को भी सरल और एकरूप बनाया गया है। रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण के लिए मैनुअल डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
मंत्रालय के मुताबिक ऐसे मामलों में बैंक अधिकारियों को अदालत में बुलाने के संबंध में भी अधिक स्पष्टता दी गई है जिनमें बैंक खुद मामले का पक्षकार नहीं है। ऐसे अधिकारी को बुलाने के लिए अदालत को लिखित रूप में ‘विशेष कारण’ दर्ज करना होगा।
इसके अलावा केंद्र सरकार को निर्दिष्ट वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं या संस्थाओं की कुछ श्रेणियों तक कानून के प्रावधानों का विस्तार करने का अधिकार दिया गया है। इससे बदलते वित्तीय परिदृश्य के अनुरूप इस कानूनी ढांचे को विस्तार दिया जा सकेगा।
मंत्रालय ने कहा कि ये सुधार तकनीकी प्रगति और बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप कानूनों को आधुनिक बनाने कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने तथा आधुनिक और दक्ष वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common