नयी दिल्ली, कांग्रेस ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर संसद के बजट सत्र के दौरान संसदीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया और दावा किया कि सत्तारूढ़ दल में ‘‘तानाशाही का डीएनए’’ का समा गया है तथा सदन जनता का न होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘दरबार’ बन गया है।
लोकसभा में पार्टी के उप नेता गौरव गोगोई ने कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की एक टिप्पणी का उल्लेख किए जाने को लेकर पलटवार किया और कहा कि क्या भाजपा के लिए नियम-कानून नहीं हैं सूत्रों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष की रस्मी जलपान बैठक से दूरी बनाई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी का नाम लिए बिना कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को पारित किए जाने पर उनकी टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी ने पार्टी संसदीय दल की बैठक में यह आरोप लगाया था कि वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को जबरन पारित किया गया और यह विधेयक संविधान पर सरेआम हमला है।
बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा सोनिया की टिप्पणी का उल्लेख किए जाने के बाद बिरला ने यह भी कहा कि एक वरिष्ठ सांसद द्वारा लोकसभा की कार्यवाही पर प्रश्न उठाना उचित नहीं है। गोगोई ने इसका उल्लेख करते हुए संवाददाताओं से कहा ‘‘ऐसा लगता है कि सदन धीरे-धीरे भारत की जनता का सदन नहीं नरेन्द्र मोदी का दरबार बन गया है क्योंकि सदन में मोदी की जयकार स्वीकृत हैं लेकिन जब जरूरी विषय पर सरकार की नीतियों की आलोचना होती है तब सत्ता पक्ष कूटनीतियों से सदन को स्थगित करता है और जवाबदेही से भागता है।’
’ उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने अपनी चिंता अध्यक्ष महोदय को पक्ष लिखकर जताई मिलने भी गए लेकिन कोई परिवर्तन नहीं दिखा। कांग्रेस नेता का कहना था ‘‘अमेरिका ने जो 27 प्रतिशत शुल्क भारत के निर्यात पर लगाया है उसे लेकर हम कार्यस्थगन की मांग कर रहे थे। एक बार भी बोलने की अनुमति नहीं मिली हम अपनी बात रिकॉर्ड पर नहीं ला पाए।’’ गोगोई ने कहा ‘‘आज दोबारा संसदीय कार्य मंत्री ने सारे नियम जानते हुए भी कांग्रेस की बैठक का उल्लेख किया। जो बात सदन के अंदर नहीं हुई है उसे सदन में उठाना सही नहीं है। उस पर संसदीय कार्य मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष की भी टिप्पणी आती है। ये हमारी संसदीय मर्यादा नियम प्रक्रिया के लिए सोचने वाली बात है।’
’ उन्होंने कहा ‘‘हमने लोकसभा में सत्ता पक्ष के सदस्य द्वारा राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष का नाम लेते हुए गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाते हुए देखा।’’उन्होंने बजट सत्र के दौरान की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा ‘‘हमने ये भी देखा कि अध्यक्ष महोदय आए लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष के संदर्भ में टिप्पणी की और विपक्ष के नेता को बोलने का मौका दिए बिना सदन को स्थगित कर दिया।’’ गोगोई ने सवाल किया कि क्या भाजपा के लिए नियम-कानून के कोई मायने नहीं हैं राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा के अंदर ‘तानाशाही का डीएनए’ समा गया है और वह लोकतंत्र की हत्या कर रही है।
उन्होंने लोकसभा में सोनिया गांधी की टिप्पणी का उल्लेख होने का हवाला देते हुए कहा ‘‘लोकसभा में राज्यसभा के सदस्यों का जिक्र नहीं होता है। कोई आरोप नहीं लगाया जाता है क्योंकि वो खुद के बचाव के लिए वहां उपस्थित नहीं होते हैं।
तिवारी का कहना था ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी पर आधारहीन आरोप लोकसभा में लगाए गए। जिसका हमारे सदस्यों ने विरोध किया और उसे कार्यवाही से निकालना पड़ा। राज्यसभा में खरगे जी ने इस बात को चुनौती दी तो सभी ने गलत माना।’’
उन्होंने आरोप लगाया ‘‘ भाजपा लोकतंत्र में यकीन ही नहीं करती। अगर परंपरा नहीं निभा सकते तो कम से कम नियमों का तो पालन करें।’’ संसद का बजट सत्र शुक्रवार को संपन्न हो गया और दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
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