भारत और ऑस्ट्रिया इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार हैं: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर्स का भारत की उनकी पहली यात्रा पर स्वागत किया। उन्होंने इस यात्रा को चार दशकों के बाद आया एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत के साथ संबंधों को मज़बूत करने के प्रति ऑस्ट्रिया की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, खासकर भारत-EU संबंधों में आ रहे बदलावों के संदर्भ में।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रिया इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार हैं। उन्होंने दिल्ली मेट्रो और अटल सुरंग जैसी भारत की प्रमुख परियोजनाओं में ऑस्ट्रिया के योगदान का ज़िक्र किया, साथ ही रेलवे परियोजनाओं, गिरनार रोपवे, स्वच्छ ऊर्जा और शहरी विकास में भी उनकी भागीदारी की बात कही।उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों का लक्ष्य ऑस्ट्रिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के विशाल पैमाने को मिलाकर एक मज़बूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) तैयार करना है।

रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।प्रधानमंत्री ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर भी ज़ोर दिया, और IIT दिल्ली तथा ऑस्ट्रिया के मोंटान विश्वविद्यालय के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत का कुशल कार्यबल ऑस्ट्रिया के इनोवेशन इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।2023 के माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष मोबिलिटी को और बढ़ाएंगे, जिसमें नर्सिंग सेक्टर भी शामिल है।

उन्होंने युवाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और लोगों के बीच संबंधों को मज़बूत करने के लिए ‘इंडिया-ऑस्ट्रिया वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम’ शुरू करने की भी घोषणा की।वैश्विक मुद्दों पर, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि संघर्षों का समाधान सैन्य तरीकों से नहीं किया जा सकता और उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में शांतिपूर्ण समाधानों का समर्थन किया। उन्होंने यह भी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और आतंकवाद से लड़ने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने अपनी बात खत्म करते हुए उम्मीद जताई कि इस दौरे से भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी और ज़्यादा इनोवेशन-आधारित और भविष्य के लिए तैयार बन पाएगी।https://x.com/narendramodi/status/2044686723570118668/photo/2

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