भारत और MERCOSUR ने इलेक्ट्रॉनिक ‘सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन’ की स्वीकार्यता को आसान बनाने के लिए भारत-MERCOSUR ‘प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट’ (PTA) के पहले अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। यह भारत और MERCOSUR देशों के बीच पेपरलेस व्यापार को सुविधाजनक बनाने और कस्टम प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस प्रोटोकॉल पर भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत में उरुग्वे के राजदूत महामहिम ने हस्ताक्षर किए। उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन (जो MERCOSUR की ‘प्रो टेम्पोर प्रेसीडेंसी’ संभाल रहे हैं) की मौजूदगी में, भारत में पराग्वे के राजदूत फ्लेमिंग राउल दुआर्ते रामोस और अर्जेंटीना व ब्राज़ील के दूतावासों के प्रतिनिधियों ने यह प्रक्रिया पूरी की।
भारत-MERCOSUR PTA (प्राथमिकता व्यापार समझौता) पर 25 जनवरी 2004 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1 जून 2009 से लागू हुआ। इस समझौते के तहत, भारत 450 टैरिफ लाइनों पर और MERCOSUR पक्ष 452 टैरिफ लाइनों पर विशेष टैरिफ रियायतें देता है।
पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल PTA के एनेक्स III (उत्पत्ति के नियम) के अनुच्छेद 16 में संशोधन करता है। इसके तहत यह प्रावधान किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक फ़ॉर्मेट में जारी ‘सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन’ (उत्पत्ति प्रमाण पत्र) की कानूनी मान्यता और मूल्य वही होगा जो पेपर फ़ॉर्मेट में जारी प्रमाण पत्रों का होता है। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक
‘सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन’ (उत्पत्ति प्रमाण-पत्र) को संबंधित पक्षों के घरेलू कानूनों के अनुसार, उचित रूप से अधिकृत संस्थाओं और अधिकारियों द्वारा जारी और इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित किया जाना आवश्यक होगा।
इस कदम से डिजिटल और पेपरलेस व्यापार दस्तावेज़ीकरण की ओर बढ़ने में आसानी होने, ‘सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन’ जारी करने और सत्यापित करने से जुड़ी लागत और समय में कमी आने, और मौजूदा भारत-मर्कोसुर PTA (प्राथमिकतापूर्ण व्यापार समझौता) के तहत व्यापार की दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है।
यह पहल भारत-मर्कोसुर PTA की संयुक्त प्रशासनिक समिति में हुई चर्चाओं के बाद शुरू की गई है। 27 नवंबर 2025 को हुई चौथी बैठक में, दोनों पक्षों ने डिजिटल ‘सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन’ के उपयोग को आसान बनाने के लिए समझौते को अपडेट करने का समर्थन किया। इसके बाद, 9 अप्रैल 2026 को संयुक्त प्रशासनिक समिति की पांचवीं बैठक में आपसी सहमति से अतिरिक्त प्रोटोकॉल के प्रस्ताव को अपनाया गया।
यह प्रोटोकॉल भारत और मर्कोसुर पक्षों द्वारा अपनी-अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने और एक-दूसरे को इसकी सूचना देने के बाद लागू होगा।
पहले अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करना व्यापार को आसान बनाने, आधुनिक कस्टम्स प्रक्रियाओं को अपनाने और द्विपक्षीय व्यापार का समर्थन करने वाले संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के प्रति भारत और मर्कोसुर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह हस्ताक्षर भारत और मर्कोसुर के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत और विस्तारित करने के लिए चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।