भारत-चीन के बीच एलएसी पर ‘रचनात्मक’ वार्ता, रिश्तों की बहाली के लिए सीमा पर शांति को लेकर सहमति

नयी दिल्ली, भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति पर ‘‘रचनात्मक’’ और ‘‘भविष्य उन्मुख’’ वार्ता की। दोनों पक्षों ने माना कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने से द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति संभव हुई है।

          दोनों देशों ने बुधवार को बीजिंग में आयोजित परामर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बैठक के दौरान सीमा की स्थिति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

          विदेश मंत्रालय ने बातचीत के एक दिन बाद कहा  ‘‘चर्चाएं रचनात्मक और भविष्य उन्मुख रहीं।’’

          भारत और चीन ने पिछले एक वर्ष में अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई उपाय किए हैं  क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष और उसके बाद चार वर्षों से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के कारण दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव आ गया था।

          मंत्रालय ने कहा  ‘‘दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया  जिससे द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति संभव हुई है।’’

          दोनों पक्ष विशेष प्रतिनिधियों की अगली बैठक की ‘‘ठोस तैयारी’’ के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए  जो चीन में आयोजित होनी है।

          पिछले वर्ष अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नयी दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता की थी  जिसमें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई परिणाम सामने आए थे।

          विदेश मंत्रालय ने डब्ल्यूएमसीसी बैठक पर कहा  ‘‘दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण  सीमा प्रबंधन  तंत्र निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।’’

          मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पक्ष ने सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ-स्तरीय अगले तंत्र की जल्द बैठक आयोजित करने पर जोर दिया।

          विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा  ‘‘दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वे कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नियमित संवाद और संपर्क बनाए रखेंगे। इसमें वे तंत्र भी शामिल होंगे जिन पर 24वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता के परिणामों के तहत सहमति बनी थी।’’

          भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) सुजीत घोष ने किया  जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा एवं महासागरीय मामलों के विभाग की महानिदेशक होऊ यानकी ने किया।

          घोष ने चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के निदेशक लियु जिनसोंग से भी मुलाकात की।संयुक्त सचिव ने चीन के सहायक विदेश मंत्री होंग लेइ से शिष्टाचार भेंट भी की।

          डब्ल्यूएमसीसी की यह बैठक ऐसे समय हुई जब भारत और चीन अपने तनावपूर्ण संबंधों को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई तनाव वाले क्षेत्रों से अपने सैनिकों को पीछे हटाया।       अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के अंतिम दो विवादित क्षेत्रों देपसांग और डेमचोक के लिए सैनिकों की वापसी संबंधी समझौते को अंतिम रूप दिया था।

          समझौते के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कजान में वार्ता की और संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कई फैसले किए।         पिछले वर्ष अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर गए थे। एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर मोदी और शी चिनफिंग के बीच विस्तृत बातचीत हुई थी।

          बैठक में मोदी ने कहा था कि भारत आपसी विश्वास  सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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