भारत में जुलाई-सितंबर में सोने की मांग 29 प्रतिशत घटकर 162.5 टन रही: डब्ल्यूजीसी

मुंबई  भारत में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सोने की मांग सालाना आधार पर 29 प्रतिशत घटकर 162.5 टन रह गई। इसकी वजह आयात शुल्क में बढ़ोतरी  कीमतों में तेज उछाल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से खरीदारी पर अंकुश लगाने की अपील रही।

           विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने यह जानकारी दी और पूरे साल के लिए मांग 625-675 टन रहने का अनुमान लगाया है। डब्ल्यूजीसी की मंगलवार को जारी ‘तीसरी तिमाही 2026 में सोने की मांग के रुझान’ रिपोर्ट के अनुसार  2025 की इसी तिमाही में सोने की मांग 229.8 टन रही थी। हालांकि  सोने की मांग का मूल्य तीन प्रतिशत बढ़कर 2 41 900 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साल की इसी तिमाही में 2 35 090 करोड़ रुपये था।

           समीक्षाधीन तिमाही के दौरान सोने का औसत भाव 4 262 अमेरिकी डॉलर प्रति ट्रॉय औंस (1 48 891 रुपये प्रति 10 ग्राम) रहा। 2025 की इसी अवधि में यह 3 457 अमेरिकी डॉलर (1 02 287 रुपये) था। इन कीमतों में आयात शुल्क और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) शामिल नहीं हैं।

           भारत में कुल आभूषण मांग 2025 की इसी तिमाही के 125 टन के मुकाबले 20 प्रतिशत घटकर 99.9 टन रह गई। हालांकि  मूल्य के लिहाज से यह 16 प्रतिशत बढ़कर 1 48 700 करोड़ रुपये हो गई।

           डब्ल्यूजीसी के भारत में क्षेत्रीय मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सचिन जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा  ‘‘जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग लगातार मजबूत बनी रही  हालांकि ऊंची कीमतों ने उपभोक्ताओं के खरीदारी के व्यवहार को प्रभावित किया। कुल मांग 162.5 टन रही और इसका मूल्य 2 41 900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे पता चलता है कि उपभोक्ता अपनी खरीदारी को किफायती कीमतों और दीर्घकालिक मूल्य के बीच संतुलित करते हुए सोने को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए हैं।’’

           उन्होंने कहा कि इसका असर खास तौर पर आभूषण खंड में दिखा  जहां मांग सालाना आधार पर 20 प्रतिशत घटी  जबकि इसका मूल्य 16 प्रतिशत बढ़ा।

           उन्होंने कहा  ‘‘तीसरी तिमाही के अंत में सोने की कीमतों में आई गिरावट से आभूषणों की मांग को समर्थन मिला और इससे कुछ टली हुई खरीदारी को बढ़ावा मिला। शादी और त्योहारों के लिए खरीदारी से भी मांग को समर्थन मिला  खासकर दक्षिण भारत में  जहां अगस्त में प्रमुख त्योहार आए। ऊंची कीमतों के बीच उपभोक्ता अब सोच-समझकर खरीदारी करने और पुराने सोने के बदले नए आभूषण लेने की योजनाओं को तेजी से अपना रहे हैं। सोने के आभूषणों के प्रति उनकी पसंद बरकरार है।’’

           समीक्षाधीन तिमाही में सोने की छड़ों और सिक्कों की कुल मांग 40 प्रतिशत घटकर 55 टन रह गई  जो पिछले साल की इसी तिमाही में 91.6 टन थी। वहीं  सोने के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की कुल मांग भी 50 प्रतिशत घटकर 5.3 टन रह गई  जो पिछले साल 10.7 टन थी।

           रिपोर्ट के अनुसार  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2026 की तीसरी तिमाही में सोना नहीं खरीदा  जबकि 2025 की इसी तिमाही में उसने 0.2 टन सोना खरीदा था।

           भारत में जुलाई-सितंबर के दौरान सोने के पुनर्चक्रण की कुल मात्रा 19.2 टन रही  जो पिछले साल की इसी तिमाही के 21.8 टन के मुकाबले 12 प्रतिशत कम है।

           समीक्षाधीन तिमाही में भारत का शुद्ध सोना आयात 46 प्रतिशत घटकर 114.1 टन रह गया  जो पिछले साल की इसी तिमाही में 211.9 टन था।

           आपूर्ति के मोर्चे पर जैन ने कहा कि आधिकारिक तौर पर सोने का आयात तेजी से घटा  पुनर्चक्रण सुस्त बना रहा और शुरुआती अनुमानों से अनौपचारिक आयात बढ़ने का संकेत मिला।

           भविष्य की स्थिति पर उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारों और शादी के मौसम से सोने की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

           जैन ने कहा  ‘‘मौसमी खरीदारी की धारणा में हालिया सुधार और त्योहारों के मौसम से पहले आभूषण कारोबारियों की तैयारियां उत्साहजनक संकेत हैं। ऊंची कीमतों का खरीदारी के फैसलों पर असर जारी रह सकता है  लेकिन हमें उम्मीद है कि उपभोक्ता हल्के वजन के आभूषणों और पुराने सोने के बदले खरीदारी के जरिये इसके अनुरूप खुद को ढालेंगे। हमारा अनुमान है कि पूरे साल सोने की मांग 625 से 675 टन के बीच रहेगी।’’ 

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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